श्रीगंगानगर। विधानसभा चुनावों में मिली अप्रत्याशित हार के बावजूद श्रीगंगानगर की जनता की सेवा का प्रण लेने वाले कांग्रेस प्रत्याशी अशोक चाण्डक ने श्रीगंगानगर को सट्टा मुक्त करने का संकल्प लिया था और शहरवासियों को विश्वास दिलाया था कि जो सट्टा युवाओं के भविष्य को खतरनाक स्थिति की ओर ले जा रहा है, उसको रोकने का हर संभव प्रयास किया जायेगा। उनके इस संकल्प को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आईजी दिनेश एमएन का तबादला कर झटका दिया है। आईजी दिनेश एमएन बीकानेर संभाग के दशकों बाद आने वाले पहले अधिकारी थे, जो सट्टा के बदले में थानाधिकारियों से पैसा नहीं ले रहे थे। उन जैसा अधिकारी फिर से मिलना मुश्किल है।
अशोक चाण्डक ने विधानसभा चुनावों में हार के बावजूद संकल्प लिया था कि वे श्रीगंगानगर की जनता के साथ पांच साल तक बने रहेंगे। उनके दुख-दर्द में भागीदार रहेंगे। वे राजनीति नहीं समाजसेवा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि जनता की सेवा करना ही उनका उद्देश्य है। उनको चुनावों में इलाके के सभी लोगों से समर्थन और प्यार हासिल हुआ था। वे इसी प्यार को बरकरार रखना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि इस बार चुनावों में कुछ प्रत्याशियों को सटोरियों ने चंदा दिया था। यह सटोरिये गंगानगर में किंग बनना चाहते हैं। कांग्रेस का सरेआम विरोध करने वाले नेता इनको संरक्षण दे रहे हैं। श्री चाण्डक ने यह भी कहा था कि श्रीगंगानगर से सट्टा खत्म होगा। युवाओं को बर्बाद नहीं होने दिया जायेगा। सट्टा न जाने कितने हजारों लोगों को बर्बाद कर चुका है। युवा मीठा जहर के रूप में सट्टा को अपना रहे हैं। इन युवाओं के भविष्य सुरक्षित रखने के लिए यह आवश्यक है कि सट्टा गंगानगर से खत्म हो। माता-बहनें भी आराम से अपना पैसा अपना पास रख सकें। यह पैसा उनसे पति या पुत्र लेकर सट्टे में नहीं उजाड़ दे।
कांग्रेस नेता अशोक चाण्डक के इस वक्तव्य के बाद विश्वास हो गया था कि आईजी दिनेश एमएन ने जो सट्टा बंद करवाया था वह फिर से चालू नहीं होगा। लेकिन अशोक गहलोत सरकार ने पहले ही झटके में श्री एमएन का तबादला कर दिया है। उनको इंटेलीजेंस में भेज दिया गया है। उनके स्थान पर डॉ. बीएल मीणा लगाये गये हैं। श्री मीणा 1999 बैच के आईपीएस हैं। उनको दिनेश एमएन जैसा कठोर अधिकारी नहीं माना जाता है।
आईजी के तबादले के बाद अब सारी जिम्मेदारी श्री अशोक चाण्डक के कंधों पर आ गयी है। उन्होंने जो विश्वास जनता में जगाया था। जनता को लगा था कि कांग्रेस के राज में तो सट्टा से शांति मिलेगी। उस विश्वास को जिंदा रखने की भारी-भरकम जिम्मेदारी श्री चाण्डक के कंधों पर आ गयी है। उनको होशियार रहना होगा।
ध्यान रहे कि कुछ छुट्टभैये नेता विधायक राजकुमार गौड़ का नाम लेकर शहर में यह प्रचार कर रहे हैं कि अब सट्टे की दुकान कौन कहां चलायेगा, वे यह तय करेंगे। वे उन बेरोजगार युवाओं को लालच भी दे रहे हैं कि सट्टा चलाओ। पुलिस नहीं रोकेगी। अब यह श्री गौड़ की भी जिम्मेदारी है कि वे अपनी ईमेज को बनाकर रखें। जो लोग उनके नाम पर उगाही करने का धंधा आरंभ कर रहे हैं। उन पर भी नियंत्रण लगाएं। वे आजाद उम्मीदवार के बावजूद जीते हैं और उनकी यह जिम्मेदारी है कि जो भरोसा इलाके की जनता ने जगाया है, वे उसको बरकरार रखें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here