अमृतसर 06 दिसंबर (वार्ता)। दशहरा उत्सव के दौरान हुए भीषण रेल हादसे की जांच रिपोर्ट को पब्लिक करने की मांग कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता कर रहे हैं। इस हादसे में राज्य मंत्रीपरिषद के सदस्य नवजोतसिंह सिद्धू की पत्नी को हादसे के दोष से दूर रखा गया है और आयोजक तथा रेल कर्मचारी पर ही इसकी  जिम्मेदारी तय की गयी है। इस मामले को लेकर पहले अकाली दल ने सवाल उठाये थे और अब इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग प्रदेश कांग्रेस के वरिष्पूठ नेता पूर्व सचिव मनदीपसिंह मन्ना ने भी की है।


श्री मन्ना ने जिला उपायुक्त के माध्यम से राज्य सरकार के नाम मांगपत्र भेज कर कहा कि जांच रिपोर्ट में जिन अधिकारियों को आरोपी बताया गया है उनके खिलाफ तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाए। ताकि हादसे में मारे गए निर्दोष व्यक्तियों के परिवारों को न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात है कि निरंकारी मिशन आश्रम में हुए ग्रेनेड हमले के दोषियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है लेकिन रेल हादसे में मारे गए निर्दोष व्यक्तियों के कातिलों के खिलाफ न तो अभी तक कोई एफआईआर दर्ज की गई है और न ही किसी को अभी तक गिरफ्तार किया गया है। जबकि इस मामले की जांच रिपोर्ट पंजाब सरकार को भी सौंप दी है।
श्री मन्ना ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा पीड़ितों को दिए गए सहायता राशि के चेक भी देरी से पास हुए और घायलों को भी निशुल्क उपचार उपलब्ध नहीं हुआ है। यहां तक कि अस्पतालों के प्रबंधकों ने घायलों का इलाज बीच में छोड़कर उनको अस्पतालों से जबरदस्ती छुट्टी दे दी। उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और पंजाब सरकार के वादे के अनुसार पीड़ित परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरी भी नहीं मिली है।



उन्होंने कहा कि श्री सिद्धू ने पीड़ित परिवारों के बच्चों को गोद लेने का एलान किया था। परंतु आज तक उनके द्वारा एक भी बच्चा गोद लेने की कोई भी कानूनी प्रक्रिया नहीं शुरू की गई। उन्होंने कहा कि श्री सिद्धू ने सिर्फ और सिर्फ इस घटना से अपनी पत्नी डाॅ नवजोत कौर को बचाने के लिए लोगों का ध्यान दूसरी तरफ करने की सुनियोजित राजनीति के तहत पीड़ितों के बच्चों को गोद लेने का एलान कर दिया था। जिस पर अमल करने से श्री सिद्धू खूद भाग गए।
सं, ठाकुर, रवि
वार्ता

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