मास्को। दुनिया में अभी भी सैन्य रूप से दूसरी महाशक्ति के रूप में स्थापित रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का 2019 का कार्यक्रम एक बार फिर से बहुत ही व्यस्त रहने वाला है। उनके कार्यक्रम को अन्तिम रूप देते हुए राष्ट्रपति कार्यालय ने जारी कर दिया है हालांकि आशिंक रूप से इसमें परिवर्तन होने की गुंजाइश से इंकार नहीं किया जा सकता है। वे रूसी संसद को संबोधित करेंगे। वहीं भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी रूस का दौरा करेंगे। श्री पुतिन ने गत वर्ष अपने भारत प्रवास के दौरान श्री मोदी को रूस आने का निमंत्रण दिया था, जो हर वर्ष होने वाली शिखर सम्मेलन का ही एक हिस्सा है। वहीं रूसी राष्ट्रपति वियतनाम व दक्षिण कोरिया की भी यात्रा करेंगे, भले ही यह दोनों विदेशी दौरे चीन को पंसद नहीं आयें लेकिन इन दोनों दोरों को राष्ट्रपति के व्यस्त कार्यक्रम में शामिल किया गया है।

संवाद सेवा तास ने राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से मिली जानकारी के आधार पर एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि श्री पुतिन संवैधानिक कर्तव्यों में से एक रूसी संसद, फेडरल असेंबली को संबोधित करेंगे है। पिछली बार, 1 मार्च, 2018 को पुतिन ने अपना संबोधन दिया था। रूस की फेडरेशन काउंसिल (संसद के ऊपरी सदन) वेलेंटीना मतविनेको के अध्यक्ष के अनुसार, राष्ट्रपति पहली तिमाही में अपना संबोधन देने वाले हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने निर्धारित तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन कहा कि यह अगले साल के पहले महीनों में होने की उम्मीद है। राष्ट्रपति के कार्यक्रम में 2-12 मार्च को क्रास्नोयार्स्क, साइबेरिया में 2019 विंडर यूनिवर्स शामिल हो सकते हैं। पुतिन को प्रतियोगिता में भाग लेने की उम्मीद है।

राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया है कि अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में जी 20 शिखर सम्मेलन है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्त के मुद्दों और एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपीईसी) शिखर सम्मेलन पर केंद्रित है। जी 20 शिखर सम्मेलन जून में जापान के ओसाका में आयोजित होने वाला है। पुतिन के पास जापान जाने का एक और कारण भी होगा – प्रधान मंत्री शिंजो आबे ने रूसी नेता को 25 अगस्त-सितंबर को विश्व जूडो चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। एपेक शिखर सम्मेलन 16-17 नवंबर को चिली में होगा। इसके अतिरक्त ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) में भ्प्री वे शामिल होंगे। ब्रिक्स नेताओं ने ब्राजील में अगली बैठक आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की, लेकिन तारीख का निधार्रण नहीं हुआ है। अन्य प्रमुख प्रारूप शंघाई सहयोग संगठन (चीन, रूस, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान) के नेताओं की बैठक है। किर्गिस्तान, जो संगठन में घूर्णन राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालेगा, वार्ता की मेजबानी करेगा।

वहीं सोवियत संघ के विघटन के बाद सभी देशों की होने वाली बैठक में भी राष्ट्रपति में जाने का कार्यक्रम तय है। CIS का अगला शिखर सम्मेलन 11 अक्टूबर, 2019 को तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात में होगा। किर्गिस्तान, जो 2019 में सीएसटीओ में घूर्णन राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालेगा, अगली बैठक की मेजबानी करेगा। सर्वोच्च यूरेशियन आर्थिक परिषद की बैठक कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में मई 2019 में होने वाली है। एक और पारंपरिक बैठक, जिसे रूसी नेता कभी याद नहीं करते, रूस और कजाकिस्तान के बीच अंतर-क्षेत्रीय सहयोग का मंच है। पुतिन के प्रस्ताव पर इस मंच के ओम्स्क में नवंबर में आयोजित होने की उम्मीद है।

रूस और बेलारूस के केंद्रीय राज्य के सर्वोच्च राज्य परिषद की बैठक भी वार्षिक आधार पर आयोजित की जाती है।  रूसी-बेलारूसी संबंधों में एक मील का पत्थर 2019 में बेलारूसी परमाणु ऊर्जा संयंत्र की पहली इकाई का निर्धारित प्रक्षेपण होगा, जिसे रूस की सहायता से बनाया जा रहा है। दिसंबर के अंत में, क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इस बात से इंकार नहीं किया कि 2019 में रूसी नेता, जिन्हें विश्व आर्थिक मंच के लिए आमंत्रित किया गया था, दावोस आ सकते हैं। हालाँकि, अभी तक ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अगर पुतिन फोरम में भाग लेने का फैसला करते हैं, जो 22-25 जनवरी के लिए निर्धारित है, तो यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ मुलाकात करने का सबसे पहला मौका होगा। दिसंबर के मध्य में, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा सैंडर्स ने कहा कि अमेरिकी नेता मंच में हिस्सा लेने की योजना बना रहे थे। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम है, जिसमें रूसी राष्ट्रपति और उनके उच्च श्रेणी के मेहमान शामिल हैं, 6-8 जून, 2019 को होने वाली है। इसमें चीन राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल हो सकते हैं। वहीं अनेक अन्य कार्यक्रम भी हैं।

भारतीय दृष्टि से देखा जाये तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रूस का दौरा कर सकते है। श्री पुतिन ने उन्हें रूस आने का निमंत्रण दिया था। हर वर्ष दोनों देशों में शिखर बैठक का आयोजन होता है। एक साल यह बैठक रूस में तो उससे अगले साल यह भारत में होती है। गत बैठक भारत में हुई थी और श्री पुनिन ने भारत का भ्रमण किया था।

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