नगर परिषद सभापति के चुनावों के लिए पार्षद भी मैदान में।

श्रीगंगानगर। नगर परिषद में भले ही इस बार पार्षदों के पल्ले कुछ भी नहीं लगा हो। वे उस मलाई का स्वाद नहीं चख पाये हों जो 2009 के कार्यकाल के पार्षद चख चुके थे किंतु इसके बावजूद अनेक पाद आगामी चुनावों के लिए तैयारियां आरंभ कर रहे हैं। श्रीगंगानगर सहित अनेक नगर परिषद के चुनाव राज्य सरकार इसी साल करवायेगी।

राज्य सरकार ने फिर से 2009 की तरह नगर परिषद सभापति का चुनाव सीधे करवाने का ऐलान किया है। कई पार्षदों को लग रहा है कि उनकी शहर में छवि बहुत ही अच्छी है। वे सभापति का चुनाव जीत सकते हैं। हालांकि यह अलग बात है कि पब्लिक की नजरें क्या कहती हैं।

श्रीगंगनगर नगर परिषद में वो हालात हैं जो आज तक शायद ही किसी ने देखे हों। इस कारण कुछ पार्षदों ने तो नगर परिषद में आना छोड़ दिया है। अब वे अपने कार्यकाल के दिनों को गिन रहे हैं। कुछ पार्षद ऐसे भी रहे जो शहर में होने वाले अवैध निर्माण की शिकायत करवाकर अपनी जेब गर्म कर गये। इस तरह के ही पार्षदों को लग रहा है कि धंधा तो चोखा है। किसी की भी शिकायत करो और धन कमाओ।

धन कमाने की इसी पिपासा के चलते वे आगामी चुनावों में सीधे सभापति का चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं ताकि सत्ता की चाबी अपने हाथों में रहे। यह पार्षद बड़े नेताओं के बंगले पर जा रहे हैं। फरियाद कर रहे हैं। यह अलग बात है कि नेताजी का आशीर्वाद मिलने के बाद जनता का भी आशीर्वाद मिलता है या नहीं।

अगर नगर परिषद सभापति की सीट आरक्षित नहीं होती है तो कई बड़े सेठ भी नगर परिषद बनने के लिए फिर से मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि यह आज तक सत्य है कि नगर परिषद सभापति बनने के बाद विधायक बनने का ख्वाब सिर्फ राधेश्याम ही पूरा कर पाये हैं बाकी का राजनीतिक जीवन नगर परिषद में ही सम्पन्न हो गया।

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