बांग्लादेश में गगनचुम्बी इमारते वहां बदले माहौल का प्रमाण। फोटो : यूट्यूब

नई दिल्ली। हाल ही बांग्लादेश में संसदीय चुनाव हुए हैं। शेख हसीना को प्रचण्ड बहुमत मिला। उनके गठबंधन अवामी लीग को प्रचण्ड बहुमत मिला। भारत सहित विश्व के कई देशों ने अपने पर्यवेक्षक भेजे थे ताकि चुनाव परिणाम के बाद लगने वाले आरोप पर देश अपनी प्रतिक्रिया दे सके। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में भी बांग्लादेश में जमकर हिंसा हुई लेकिन शेख हसीना लगातार दूसरी बार सत्ता में लौट आने में कामयाब हो गयी। उनकी प्रतिद्वंद्वी खालिदा जिया की पार्टी को मजबूत विपक्ष बनने लायक जनसमर्थन हासिल नहीं हुआ तो उन्होंने आरोप लगा दिया  कि चुनाव में धांधली हुई है। उसी तरह की धांधली के आरोप जिस तरह से हारने वाली पार्टी लगाती है।

बांग्लादेश में ऐसा क्या हुआ कि 300 सीट वाली संसदीय दल में शेख हसीना को 288 सीट हासिल हो गयीं। इसका अर्थ यह है कि बांग्लादेश में अब विपक्ष रहा ही नहीं। बांग्लादेश की जनता ने विकास को प्राथमिकता दी।  विश्व अब उसको अल्प विकसित देश की श्रेणी से बाहर निकालकर तीसरी दुनिया के देशों यानी विकासशील देश की श्रेणी में रखने वाला है।

भारत से बंटवारे के बाद बांग्लादेश पाकिस्तान का हिस्सा बना था और उसको पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था। पश्चमी पाकिस्तान याने आज का पाकिस्तान पंजाबी लोगों की सत्ता का केन्द्र रहा है और बांग्लादेश के साथ सौतेला व्यवहार होने का आरोप लगता था। इस कारण वहां आजादी की मांग उठने लगी और 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान के हाथों से पूर्वी पाकिस्तान निकलकर बांग्लादेश बन गया। स्वतंत्र बांग्लादेश को बनाने में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। वहां आदोलन कर रहे लोगों पर जब पाकिस्तानी सेना ने जुल्म ढहाये तो भारतीय सेना आगे आई।

आजादी के बाद भी बांग्लादेश में गरीबी वहां के लोगों का मुकद्दर बनी हुई थी। इस गरीबी को खत्म करने के प्रयास ज्यादा नहीं हुए। जब प्रयास जमीनीस्तर पर हुए तो वहां के हालात बदलने लगे हैं। आज दक्षिण एशिया के अनेक देशों से बांग्लादेश कई मामलों में आगे निकल चुका है। बांग्लादेश में बैंकिंग लेनदेन भारत के मु

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना।

काबले भी ज्यादा हो गया है। कभी बांग्लादेश के लोग भारत सहित अवैध रूप से घुसपैठ कर अच्छी जिंदगी की तलाश करते थे।

पड़ोसी देश में विकास की एक गाथा लिखने का प्रयास हो रहा है, यह अच्छी बात है लेकिन चीन बांग्लादेश में भी अपना प्रभुत्व बढ़ाता जा रहा है और वह पाकिस्तान-श्रीलंका की तरह बांग्लादेश को भी अपने कर्जे के बोझ तले दबाना चाहता है। भारत को चारों तरफ से घेरने की कोशिश कर रहा चीन बांग्लादेश के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए धन मुहैया करवाकर वहां की सरकार और जनता पर अपना दबदबा बनाने के लिए काम कर रहा है। जो रिपोर्ट आ रही हैं वह भारत के लिए चिंता का विषय हैं।

विश्व की प्रमुख संवाद सेवा बीबीसी हिन्दी ने बांग्लादेश के हालिया घटनाक्रम पर एक रिपोर्ट तैयार की है।

क्या कहती है बीबीसी.कॉम की रिपोर्ट

मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर में बांग्लादेश तेज़ी से प्रगति कर रहा है. कपड़ा उद्योग में बांग्लादेश चीन के बाद दूसरे नंबर पर है. हाल के एक दशक में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था औसत 6 फ़ीसदी की वार्षिक दर से आगे बढ़ी है. साल 2018 जून महीने में यह वृद्धि दर 7.86 फ़ीसदी तक पहुंच गई थी.

1974 में भयानक अकाल के बाद 16.6 करोड़ से ज़्यादा की आबादी वाला बांग्लादेश खाद्य उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बन चुका है. 2009 से बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति आय तीन गुनी हो गई है.

इस साल प्रति व्यक्ति आय 1,750 डॉलर हो गई. बांग्लादेश में बड़ी संख्या में लोग ग़रीबी में जीवन बसर कर रहे हैं लेकिन विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन 1.25 डॉलर में अपना जीवन चलाने वाले कुल 19 फ़ीसदी लोग थे जो अब 9 फ़ीसदी ही रह गए हैं

शेख़ हसीना लगातार तीसरी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं. हसीना के नेतृत्व में बांग्लादेश हाल के वर्षों में एशिया के सबसे सफल देशों में से एक उभरकर सामने आया है.

एक वक़्त था जब बांग्लादेश (उस वक़्त उसे पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था) पाकिस्तान का सबसे ग़रीब इलाक़ा था. 1971 में आज़ादी के बाद भी बांग्लादेश भीषण ग़रीबी में रहा. 2006 के बाद से बांग्लादेश की तस्वीर से धूल छंटने लगी और तरक़्क़ी की रेस में पाकिस्तान से आगे निकल गया.

बांग्लादेश की वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर पाकिस्तान से 2.5 फ़ीसदी आगे निकल गई. जाने-माने अर्थशास्त्री कौशिक बासु का कहना है कि बांग्लादेश विकास दर में भारत को भी पीछे छोड़ देगा.

बांग्लादेश की आबादी 1.1 फ़ीसदी दर से प्रति वर्ष बढ़ रही है जबकि पाकिस्तान की दो फ़ीसदी की दर से बढ़ रही है. इसका मतलब यह भी है कि पाकिस्तान की तुलना में बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति आय भी तेज़ी से बढ़ रही है.

कहा जा रहा है कि बांग्लादेश बड़े शांत तरीक़े से अपना कायापलट कर रहा है. कौशिक बसु का मानना है कि बांग्लादेश के समाज के बड़े हिस्से में बदलाव की बयार है और यहां महिलाओं का सशक्तीकरण भी तेज़ी से हो रहा है. बांग्लादेश में एक व्यक्ति की औसत उम्र 72 साल हो गई है जो कि भारत के 68 साल और पाकिस्तान के 66 साल से ज़्यादा है.

विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2017 में बांग्लादेश में जिन लोगों का बैंक खाता है उनमें से 34.1 फ़ीसदी लोगों ने डिजीटल लेन-देन किया जो दक्षिण एशिया में औसत 27.8 फ़ीसदी ही है.

बांग्लादेश की वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर पाकिस्तान से 2.5 फ़ीसदी आगे निकल गई. जाने-माने अर्थशास्त्री कौशिक बासु का कहना है कि बांग्लादेश विकास दर में भारत को भी पीछे छोड़ देगा.

बांग्लादेश की आबादी 1.1 फ़ीसदी दर से प्रति वर्ष बढ़ रही है जबकि पाकिस्तान की दो फ़ीसदी की दर से बढ़ रही है. इसका मतलब यह भी है कि पाकिस्तान की तुलना में बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति आय भी तेज़ी से बढ़ रही है.

कहा जा रहा है कि बांग्लादेश बड़े शांत तरीक़े से अपना कायापलट कर रहा है. कौशिक बसु का मानना है कि बांग्लादेश के समाज के बड़े हिस्से में बदलाव की बयार है और यहां महिलाओं का सशक्तीकरण भी तेज़ी से हो रहा है. बांग्लादेश में एक व्यक्ति की औसत उम्र 72 साल हो गई है जो कि भारत के 68 साल और पाकिस्तान के 66 साल से ज़्यादा है.

विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2017 में बांग्लादेश में जिन लोगों का बैंक खाता है उनमें से 34.1 फ़ीसदी लोगों ने डिजीटल लेन-देन किया जो दक्षिण एशिया में औसत 27.8 फ़ीसदी ही है.

ज़्यादातर मोर्चों पर बांग्लादेश प्रदर्शन के मामले में सरकारी लक्ष्यों से आगे निकल चुका है. बांग्लादेश अभी मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है. कपड़ा उद्योग में बांग्लादेश का प्रभुत्व दुनिया भर में जाना जाता है.

बांग्लादेश में बनने वाले कपड़ों का निर्यात सालाना 15 से 17 फ़ीसदी की दर से आगे बढ़ रहा है. 2018 में जून महीने तक कपड़ों का निर्यात 36.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हसीना का लक्ष्य है कि 2019 तक इसे 39 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए और 2021 में बांग्लादेश जब अपनी 50वीं वर्षगांठ मनाए तो यह आंकड़ा 50 अरब डॉलर तक पहुंच जाए.

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में विदेशों में काम करने वाले क़रीब 25 लाख बांग्लादेशियों की भी बड़ी भूमिका है. विदेशों से जो ये पैसे कमाकर भेजते हैं उनमें सालाना 18 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हो रही है और 2018 में 15 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

हालांकि हसीना जानती हैं कि देश में टिकाऊ अर्थव्यवस्था के लिए उद्योग-धंधों को बढ़ाना होगा. बांग्लादेश कम लागत वाले मैन्युफ़ैक्चरिंग हब से आगे निकलना चाहता है जो बाहरी धन और विदेशी मदद पर निर्भर है.

2009 में शेख हसीना ने डिजिटल बांग्लादेश लॉन्च किया था ताकि टेक्नॉलजी को बढ़ावा दिया जा सके. बांग्लादेश की राजधानी ढाका में टेक्नॉलजी सेक्टर भी पांव पसार रहा है. ढाका के सीईओ भारत के आईटी सेक्टर से सीख उसे टक्कर देना चाहते हैं.

भारत दवाइयों के निर्माण में भी काफ़ी आगे है और बांग्लादेश अपने पड़ोसी को इसमें भी टक्कर देने की मंशा रखता है. बांग्लादेश की सरकार देश भर में 100 विशेष आर्थिक क्षेत्रों का नेटवर्क तैयार करना चाहती है. इनमें से 11 बनकर तैयार हो गए हैं और 79 पर काम चल रहे हैं.

बांग्लादेश छोटा सा देश है पर पर इसकी आबादी बहुत ज़्यादा है. यहां की आबादी बहुत ही सघन है. बांग्लादेश बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री फ़ैसल अहमद बड़ी आबादी को अपने मुल्क की तरक्की में काफ़ी लाभकारी मानते हैं. फ़ैसल ने अपने कई इंटरव्यू में कहा है कि सघन आबादी के कारण सोशल और इकनॉमिक आइडिया को ज़मीन पर उतारने में काफ़ी मदद मिलेगी.

बांग्लादेश में आर्थिक मोर्चे पर सब कुछ बढ़िया से चलने का ये मतलब ये क़तई नहीं है कि यहां चुनौतियां नहीं हैं. बांग्लादेश में दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बीच तीखी प्रतिद्वंद्विता है. बांग्लादेश की सियासत में दो महिलाओं शेख हसीना और पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया का प्रभुत्व रहा है.

जब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान था तब दोनों ही नेताओं के परिवारों की बांग्लादेश की आज़ादी में अहम भूमिका रही. पिछले तीन दशकों में दोनों महिलाएं सत्ता में आती-जाती रही हैं. इसके साथ ही दोनों जेल में भी रहीं.

ख़ालिदा ज़िया भ्रष्टाचार के मामले में जेल में हैं और वो जेल से ही अपनी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी चला रही हैं. ख़ालिदा ज़िया का दावा है कि उन्हें झूठ मुक़दमों में फंसा जेल में जानबूझकर बंद किया गया है.

1981 से शेख हसीना सत्ताधारी अवामी लीग पार्टी का नेतृत्व कर रही हैं. इस पार्टी का गठन उनके पिता शेख मुजिबुर रहमान ने किया था. रहमान देश के पहले राष्ट्रपति थे. 1975 में सेना के कुछ लोगों ने रहमान और उनके परिवार के ज़्यादातर लोगों की हत्या कर दी थी.

अतीत के चुनावों में इस पार्टी को भारी जनसमर्थन मिला है. हालांकि विपक्ष और मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि सत्ताधारी पार्टी अवामी लीग सत्ता हासिल करने के लिए चुनावों में धांधली और डराने-धमकाने का काम करती है.

अवामी लीग पिछले 10 सालों से सत्ता में थी. कई लोग इस बात को मानते हैं कि सत्ताधारी पार्टी की जीत से विकास को और रफ़्तार मिलेगी.

बांग्लादेश की सफलता में रेडिमेड कपड़ा उद्योग की सबसे बड़ी भूमिका मानी जाती है. कपड़ा उद्योग बांग्लादेश के लोगों को सबसे ज़्यादा रोज़गार मुहैया कराता है. कपड़ा उद्योग से बांग्लादेश में 40.5 लाख लोगों को रोज़गार मिला हुआ है.

2018 में बांग्लादेश के कुल निर्यात में रेडिमेड कपड़ों का योगदान 80 फ़ीसदी रहा. बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के लिए 2013 में राना प्लाज़ा आपदा किसी बड़े झटके से कम नहीं थी.

कपड़ों की फ़ैक्ट्री की यह बहुमंजिला इमारत गिर गई थी और इसमें 1,130 लोग मारे गए थे. इसके बाद कपड़े के अंतर्राष्ट्रीय ब्रैंड कई तरह के सुधारों के लिए मजबूर हुए

फ़ैक्ट्रियों को अपग्रेड किया गया और इसमें काम करने वाले कामगारों की स्थिति में बेहतरी के लिए कई क़दम उठाए गए. बांग्लादेश में कपड़ों की सिलाई का काम व्यापक पैमाने पर होता है और इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं. 2013 के बाद से अब ऑटोमेटेड मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है.

अमरीका और चीन के बीच छिड़े ट्रेड वॉर में बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को काफ़ी उम्मीद है. बांग्लादेश को लगता है कि अगर चीन का कपड़ा निर्यात कम हुआ तो वो इसकी भरपाई की क्षमता रखता है. हालांकि इसका फ़ायदा वियतनाम, तुर्की, म्यांमार और इथोपिया को भी मिलने की बात कही जा रही है.

टेक्सटाइल इंडस्ट्री में बांग्लादेश को दुनिया के कई देशों से कड़ी टक्कर मिल रही है. बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफ़ैक्चरर्स एंड एक्पोर्टर्स असोसिएशन के अनुसार पिछले पांच सालों में चार हज़ार 560 कपड़े की फ़ैक्ट्रियों में से 22 फ़ीसदी कम हुए हैं.

मार्केट रिसर्च कंपनी सीएलएसए के स्ट्रैटिजिस्ट क्रिस्टोफर वुड्स ने अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए भविष्य में कई अड़चने भी हैं.

वुड्स ने कहा है, ”बांग्लादेश की इस इंडस्ट्री में काम करने वालों को बहुत कम पैसे मिलते हैं. अगर बांग्लादेश को 2024 में संयुक्त राष्ट्र अल्प विकसित देश के दर्जे को विकासशील देश में तब्दील कर देता है तो टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए यह देश उत्पाद शुल्क मुक्त बाज़ार नहीं रह जाएगा. बांग्लादेश के सामने दूसरी चुनौती यह है कि यहां दूसरे सेक्टर प्रभावी रूप से विकसित नहीं हो रहे हैं. बांग्लादेश में और विदेशी निवेश की ज़रूरत है.”

बांग्लादेश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई की स्थिति बहुत मज़बूत नहीं है. हालांकि शेख हसीना के पिछले नौ सालों के शासनकाल में एफ़डीआई तीन गुनी हो गई. वित्तीय वर्ष 2008 में एफडीआई 96.1 करोड़ डॉलर से बढ़कर इस साल जून में तीन अरब डॉलर तक पहुंच गई. हालांकि यह बाक़ी के एशियाई देश वियतनाम और म्यांमार से कम ही है.

बांग्लादेश में व्यापार करना कितना आसान है, इस मामले में इसकी रैंकिंग बहुत ही ख़राब है. विश्व बैंक ने ‘ईज़ ऑफ डुईंग बिज़नेस’ यानी व्यापारिक सुगमता के मामले में बांग्लादेश की रैंकिंग 190 देशों में 176वें नंबर पर रखा है.

इतनी ख़राब रैंकिंग के लिए लालफ़ीताशाही, कमज़ोर आधारभूत ढांचा और ख़राब परिवहन व्यवस्था को ज़िम्मेदार बताया गया है. इस मामले में सिंगापुर और वियतनाम जैसे देश बांग्लादेश से बहुत आगे हैं.

शेख हसीना ने अपने कार्यकाल में डिजिटल व्यवस्था को काफ़ी दुरुस्त किया है. बांग्लादेश के और विदेशी मीडिया में इसके लिए अमरीका में पढ़े हसीना के बेटे को श्रेय दिया जाता है.

डिजिटल बांग्लादेश प्रोग्राम में शेख हसीना के बेटे सजीब अहमद की भूमिका को काफ़ी अहमियत दी जाती है. इसके तहत बांग्लादेश में सूचना टेक्नॉलजी का काफ़ी विस्तार हुआ और देश भर में इससे जुड़े 12 हाइटेक पार्क बनाए गए.

कहा जा रहा है कि बांग्लादेश आईटी सेक्टर में भारत से मुक़ाबला करने की महत्वाकांक्षा रखता है. सॉफ़्टवेयर कंपनी टेक्नोहैवेन और बांग्लादेश असोसिएशन ऑफ सॉफ़्टवेयर एंड इन्फ़र्मेशन सर्विस के सह संस्थापक हबीबुल्लाह करीम ने फ़ाइनैंशल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा है, ”बांग्लादेश में इस साल 30 जून तक आईटी सर्विस और सॉफ़्टवेयर का निर्यात 80 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया और इस वित्तीय वर्ष में यह एक अरब डॉलर के पार चला जाएगा. सरकार ने 2021 तक इसका लक्ष्य पांच अरब डॉलर रखा है जो कि काफ़ी चुनौतीपूर्ण है.”

करीम ने इस इंटरव्यू में कहा है कि 80 करोड़ डॉलर से तीन साल में पांच अरब डॉलर तक पहुंचने का मतलब हुआ कि छहगुने की बढ़ोतरी होनी चाहिए. करीम कहते हैं कि बांग्लादेश में आईटी सेक्टर में कई काम हुए हैं. अब यहां एयरलाइन, होटल बुकिंग और इंश्योरेंस क्लेम सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है.

आईटी कंपनी ई-जेनरेशन के चेयरमैन और बांग्लादेश असोसिएशन ऑफ सॉफ़्टवेयर एंड इन्फ़र्मेशन सर्विस के पूर्व प्रमुख शमीन अहसान ने एशियन निक्केई रिव्यू को दिए इंटरव्यू में कहा है, ”40 साल पहले बांग्लादेश में कुछ कंपनियों से कपड़ा उद्योग खड़ा हुआ था. अब बांग्लादेश 30 अरब डॉलर की क़ीमत का कपड़ा निर्यात करता है और हमसे केवल चीन ही आगे है. हम ऐसा ही आईटी सेक्टर में करना चाहते हैं.”

दुनिया भर में जेनरिक दवाइयों के निर्माण में भारत का नाम है लेकिन बांग्लादेश इस क्षेत्र में चुनौती देने की कोशिश कर रहा है. अल्पविकसित देश का दर्जा होने के कारण बांग्लादेश को पेटेंट के नियमों से छूट मिली हुई है.

इस छूट के कारण बांग्लादेश जेनरिक दवाइयों के निर्माण में भारत को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है. बांग्लादेश जेनरिक दवाइयों के निर्माण में दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है और 60 देशों में इन दवाइयों का निर्यात कर रहा है.

बांग्लादेश ख़राब आधारभूत ढांचा के कारण कई मामलों में पिछड़ जाता है. हालांकि चीन कई मोर्चों पर बांग्लादेश को वन बेल्ट वन रोड परियोजना के तहत मदद कर रहा है. चीन बांग्लादेश के कई बड़े प्रोजेक्टों में आर्थिक मदद मुहैया करा रहा है.

चीन पद्मा नदी पर चार अरब डॉलर का एक ब्रिज रेलवे लाइन बना रहा है जो मुल्क के दक्षिणी-पश्चिमी और उत्तरी-पूर्वी इलाक़ों को जोड़ेगा. चीन ने बांग्लादेश को 38 अरब डॉलर का क़र्ज़ देने की प्रतिबद्धता जताई है.

चीन भारी क़र्ज़ मुहैया कराने के कारण आलोचना झेल रहा है कि छोटे देशों को क़र्ज़ों के दुष्चक्र में फंसा रहा है. ऐसा श्रीलंका और पाकिस्तान दोनों के लिए कहा जा रहा है. हालांकि बांग्लादेश में इस आलोचना को लेकर बहुत हलचल नहीं है.

2018 में चीन ने बांग्लादेश के ढाका स्टॉक एक्सचेंज का 25 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीद लिया था. इसे ख़रीदने की कोशिश भारत ने भी की थी कि लेकिन चीन ने इसकी ज़्यादा क़ीमत चुकाई और भारत के हाथ से यह सौदा निकल गया था. बांग्लादेश पाकिस्तान के बाद चीन से सैन्य हथियार ख़रीदने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है. शेख हसीना भी इस बात को मानती हैं कि चीन इस इलाक़े में बड़ी भूमिका निभा रहा है.

बांग्लादेश कई मोर्चों पर न केवल पाकिस्तान से आगे निकल चुका है बल्कि भारत को भी पीछे छोड़ रहा है. बाल मृत्यु दर, लैंगिक समानता और औसत उम्र के मामले में बांग्लादेश भारत को पीछे छोड़ चुका है.

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार 2013 में बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय 914 डॉलर थी जो 2016 में 39.11 फ़ीसदी बढ़कर 1,355 डॉलर हो गई. इसी अवधि में भारत में प्रति व्यक्ति आय 13.80 फ़ीसदी बढ़ी और 1,706 डॉलर तक पहुंची.

पाकिस्तान में इसी अवधि में 20.62 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई और 1,462 डॉलर पर पहुंच गई. कहा जा रहा है कि अगर बांग्लादेश इसी गति से प्रगति करता रहा तो 2020 में भारत को प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी पीछे छोड़ देगा.

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