शनिवार को पेरिस सहित कई शहरों में हुए हिंसक प्रदर्शन। फोटो : रायटर

पेरिस। महंगाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले पीली जैकेट्सधारी क्या शहरी नक्सली हो गये हैं‌? उनमें नक्सलवाद की भावना पनप गयी है? यह सवाल इसलिए भी खड़ा हो रहा है क्योंकि अब वे सरकारी सम्पत्ति ही नहीं बल्कि निजी सम्पत्ति को भी नुकसान पहुंचाने लगे हैं। पुलिस के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने उनके खिलाफ सख्त कदम उठाये हैं लेकिन वे पर्याप्त नहीं कहे जा सकते।

भीषण् सर्दी के दौर में भी पीली जैकेट्स पहने लोगों ने शनिवार को एक बार फिर से फ्रांस के अनेक शहरों में हिसंक प्रदर्शन किया। कुछ दिनों की शांति के बाद फिर से यह लोग सड़कों पर उतरे। यह लोग फ्रांस की संसद की ओर कूच कर रहे थे, पुलिस ने इनको रोकने के लिए पानी की बौछार और आंस गैस के गोलों का सहारा लिया।

राष्ट्रपति इमैनुएल मार्केन ने राष्ट्रपति बनने के बाद आर्थिक नीतियों को नये  सिरे से परिभाषित किया। फ्रांस के मीडिल और  निम्न आय वर्ग के लोगों का आरोप है कि इससे उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है। बढ़ती होती जीवनशैली के कारण वे अपने को सहज नहीं मानते। इस कारण वे राष्ट्रपति की नीतियों का विरोध करने के लिए शनिवार व रविवार को अवकाश के दिनों में हिंसक प्रदर्शन करते हैं।

संवाद सेवा रायटर ने मीडिया रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने राजमार्ग स्थित टूलबूथों पर कब्जा करने का प्रयास किया। हिंसा को रोकने के लिए राष्ट्रपति ने इस बार ज्यादा बेहतर तैयारी करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को आदेशित किया था किंतु अनेक जगह फिर भी आगजनी की घटनाएं हुईं।

हिंसक प्रदर्शन करने वालों में कम आय प्राप्त लोग और आय में लगातार हो रही कटौती से प्रभावित लोग हैं। वे राष्ट्रपति मॉर्केन पर आरोप लगाते हैं कि उनकी मांगों पर राष्ट्रपति ने अपने कान को बंद कर दिया है। वे उनकी आवश्यकताओं को समझ नहीं पा रहे हैं। हालात यह रहे कि एक सरकारी प्रवक्ता अपने कार्यालय को छोड़कर पीछे के दरवाजे से भाग गये। प्रदर्शनकारियों ने परिसर में ही घुसकर तोड़फोड़ आरंभ कर दी।

गहमंत्री क्रिस्टोफ़ कास्टानेर ने कहा कि लगभग 50,000 लोगों ने देश भर के शहरों में विरोध प्रदर्शन किया था।

 

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