श्रीगंगानगर। पुरानी आबादी में सब्जीमंडी में सड़क और नाली निर्माण की मांग को लेकर दुकानदार-लोग धरने पर बैठ गये। धरने से रास्ता भी जाम हो गया। नगर परिषद के अधिकारी मौके पर पहुंचे और यह कहकर वापिस आ गये कि हमारे पास निर्माण कार्यों के लिए बजट नहीं है। समाचार लिखे जाने के समय तक क्षेत्र का बाजार बंद था और लोग धरने पर बैठे थे।
पुरानी आबादी सब्जी मंडी में नियमित रूप से सफाई नहीं होती। दुकानदारों की बातों पर यकीन किया जाये तो पता चलता है कि दो-दो माह तक सफाई कर्मचारी नाला साफ नहीं करने आते। इस कारण क्षेत्र में इतनी ज्यादा दुर्गंध आती है कि लोग वहां पर सामान खरीदना तो दूर खड़ा होना भी पसंद नहीं करते।
पुरानी आबादी सब्जीमंडी में अधिकांश दुकानें सब्जी अथवा अन्य खाद्य पदार्थों की हैं। नियमित सफाई नहीं होने के कारण वहां हल्की बारिश में गंदा पानी इक_ा हो जाता है। लोग वहां पर खड़ा होना भी पंसद नहीं करते। दुकानदार अपना काम धंधा छोड़कर पानी निकालने के लिए जुट जाते हैं क्योंकि सूचना देने के बावजूदनगर परिषद के कर्मचारी तो वहां काम करने के लिए आते नहीं।
दुकानदार पिछले काफी समय से पार्षद अशोक मेठिया के माध्यम से नगर परिषद को ज्ञापन दे रहे थे और मांग कर रहे थे कि उनकी मुख्य सड़क को ऊंचा किया जाये और नाला निर्माण भी दुबारा किया जाये ताकि वे चैन से अपने परिवार के लिए रोटी तो कमा सकें। इन मांगों पर नगर परिषद ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके विरोध में पार्षद और मोहल्ले के लोग एकत्र हो गये। दुकानदारों ने भी अपने संस्थान बंद कर दिये और सभी लोग एक दरी पर बैठ गये जहां सभा आरंभ हो गयी। मुख्य रास्ते को बंद कर दिया गया।
धरना की सूचना मिलने के बाद नगर परिषद के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। दुकानदारों और लोगों ने अपनी मांगों से उनको अवगत करवाया तो नगर परिषद के अधिकारी यह कहकर फिरंगियों की तरह वापिस लौट गये कि हमारे पास बजट नहीं है। अधिकारी वापिस चले गये और दुकानदार-लोग वापिस धरने पर बैठ गये। धरना जारी है। वहीं आयुक्त महोदय, शहर के हालात को बढिय़ा बनाने के लिए कलक्टर के साथ मंथन कर रहे हैं। उनको आधा दर्जन बार सूचना दी गयी और नाले की सफाई और सड़क निर्माण के बारे में कोई कार्य नहीं किया गया, अब वे शहर को बेहतर बनाने के लिए अपनी प्लानिंग कलक्टर को बता रहे हैं। लोगों में आयुक्त और सभापति दोनों के खिलाफ गुस्सा है।

ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को तुरंत राहत दे बीमा कंपनियां : नकाते
श्रीगंगानगर। पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि से अनेक तहसील क्षेत्र में किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा। इस संबंध में जिला कलक्टर ने कृषि विभाग के अधिकारियों को आदेशित किया है कि वह पीडि़त किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राहत प्रदान करने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही शीघ्र करें।
कलक्टर शिवप्रसाद नकाते ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नियम के अनुसार प्रकृति आपदा से प्रभावित किसानों को राहत दिये जाने के प्रावधान हैं। पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि से अनेक तहसील क्षेत्र के किसानों की फसल को नुकसान हुआ। इस संबंध में पूर्व में ही गिरदावरी के आदेश जारी कर दिये गये थे।
सरकारी रिपोर्ट को बीमा कंपनी के स्थानीय कार्यालय में पहुंचाया जाये और अधिकारियों से लगातार सम्पर्क में रहकर यथाशीघ्र किसानों को राहत पहुंचाने के लिए कार्य किया जाये। कलक्टर ने बीएडीपी के तहत होने वाले विकास कार्यों को भी शीघ्र आरंभ करने के आदेश दिये। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही नहीं होनी चाहिये। वहीं निर्माण एजेंसियों को आदेशित किया है कि वे निर्माणाधीन कार्यों की समीक्षा करके उनको निर्धारित अवधि में पूरा किया जाये।

अधिकारियों के मुख्यालय छोडऩे पर रोक
जल संंसाधन विभाग के एसई को 17 सीसी में चार्जशीट
श्रीगंगानगर। आगामी आदेशों तक कोई भी उपखण्ड या जिलास्तर का अधिकारी मुख्यालय नहीं छोड़ेगा। इस संबंध में जिला कलक्टर ने आदेश जारी कर दिये हैं। मुख्यालय छोडऩे से पूर्व अनुमति लेनी आवश्यक होगी। वहीं जल संसाधन विभाग के बिजयनगर एसई को 17 सीसी में चार्जशीट दिये जाने के आदेश दिये गये हैं।
जिला कलक्टर शिवप्रसाद नकाते मंगलवार को साप्ताहिक बैठक ले रहे थे। बैठक में जिला कलक्टर ने सभी अधिकारियों को आदेशित किया कि जिला अथवा उपखण्ड स्तर का कोई भी अधिकारी अगर अवकाश पर जाता है तो उसको पूर्व में अनुमति लेनी होगी। यह अनुमति आवश्यक होने पर दूरभाष से भी ली जा सकती है। बिना सूचना के अगर कोई भी अधिकारी अवकाश पर जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जायेगी।
वहीं बिजयनगर के अधीक्षण अभियंता को भी 17 सीसी में चार्जशीट दिये जाने के आदेश दिये गये हैं। अधीक्षण अभियंता बिना सूचना के ही अवकाश पर चले जाते हैं। पिछली बार भी उन्होंने एसई को बैठक में उपस्थित होने के आदेश दिये थे, किंतु वह बैठक में नहीं आये। इस बात को जिला कलक्टर ने गंभीरता से लिया है। जिला कलक्टर ने यह भी आदेशित किया कि अतिक्रमण हटाने जैसे आदि कार्य किये जाते हैं तो उसकी वीडियोग्राफी करवायी जाये। अगर कोई सरकारी कार्य में बाधा बनता है तो उसके खिलाफ पुलिस में तुरंत रिपोर्ट दी जाये। पुलिस विभाग को भी आदेशित किया गया कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ होने वाले अभद्र व्यवहार के मामले को गंभीरता से लिया जाये और आवश्यक कार्यवाही निर्धारित अवधि में पूरी की जाये।

अब डिपू होल्डर भी नशा मुक्त गंगानगर अभियान में शामिल
श्रीगंगानगर। पिछले कुछ माह से श्रीगंगानगर को नशा मुक्त करने का अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान जमीनी हकीकत बनता हुआ नजर तो नहीं आ रहा है क्योंकि नशे के कारोबार में आज भी लोग संलिप्त हैं और बड़े स्तर पर नशीली दवाइयों और स्मैक-अफीम आदि की बिक्री हो रही है। लेकिन कागजों में अब रसद विभाग को भी इस अभियान में शामिल कर लिया गया है।
नशीली दवाओं और मादक पदार्थों की बिक्री से जिले में क्राइम का ग्राफ बहुत ज्यादा हो गया है। पुलिस के सरकारी रिकॉर्ड में भले ही हर साल 10 हजार से कम मुकदमे दर्ज होते हों लेकिन हकीकत यही है कि क्राइम पिछले कुछ सालों में पांच गुणा भी ज्यादा हो गया है। क्राइम पर नियंत्रण के लिए छजगरिया बस्ती में पुलिस चौकी भी बनायी गयी लेकिन क्राइम पर कंट्रोल नहीं हुआ।
छजगरिया बस्ती में नशे के लिए आज भी बाहरी लोग आते हैं और स्थानीय युवा भी नशे की पूर्ति के लिए अंधेरा होते ही वहां से गुजरने वाले साइकिल सवार और पैदल लोगों को लूटने का अपराध सरेआम करते हैं। शिकायत पुलिस तक भी जाती है लेकिन कागजी कार्यवाही होकर रह जाती है। परिवाद लिया जाता है और उसके बाद परिवादी चक्कर काट-काटकर थक जाता है, काम कुछ भी नहीं होता।
वहीं जिला कलक्टर शिवप्रसाद मदन नकाते बैठक करते हैं। यह बैठक मंगवार को होती है। प्रत्येक साप्ताहिक बैठक में कलक्टर एडीसी को आदेशित करते हैं। वहीं नशीली दवाओं के अलावा जो अन्य नशा बिक रहा है, उस पर नियंत्रण के लिए एसपी को आदेश देने के लिए कुछ नहीं होता। वहीं सच तो यह भी है कि औषधि विभाग के पास उन लोगों पर कार्यवाही का अधिकार भी नहीं है जिनके पास लाइसेंस नहीं है। एडीसी का सूचना तंत्र भी इतना मजबूत नहीं होता, जितना पुलिस का होता है। पुलिस के पास ज्यादा संख्या में कर्मचारी होते हैं। हर कर्मचारी की एक बीट होती है। उसके पास वैध या अवैध संसाधनों की कमी नहीं होती। वहीं एडीसी के पास पांच कर्मचारी हैं। इनमें दो बाबू, तीन इंस्पेक्टर। 20 लाख की आबादी। संसाधन के नाम पर एक सरकारी कार और एक सरकारी कार्यालय। दफ्तर भी शहर से पांच किमी दूर। एकांत में। जहां आम आदमी की पहुंच भी नहीं होती। जहां आम आदमी का जाना नहीं होता। एडीसी या उनके इंस्पेक्टर के पास सूचना आये तो कहां से आये।
वहीं जिला कलक्टर सोच रहे हैं कि नशीली दवाओं पर नियंत्रण से ही जिला अपराध मुक्त या नशा मुक्त हो जायेगा, तो यह उनकी भूल है। नशीली दवाओं से ज्यादा अफीम-स्मैक की बिक्री हो रही है। अब कागजों में अभियान चल रहा है। सरकारी तंत्र को भले ही लग रहा हो कि इससे वे कोई उपलब्धि हासिल कर लेंगे, तो यह उनकी भूल ही होगी। वहीं अब जिला कलक्टर ने नया फरमान जारी कर दिया है। रसद विभाग को भी नशा मुक्त गंगानगर अभियान में शामिल कर लिया गया है। इस अभियान के तहत सभी उचित मूल्य दुकानों के बाहर नशे के खिलाफ बोर्ड लगाया जायेगा। सरकारी तंत्र को यह भी बताना होगा कि सभी सरकारी दफ्तरों पर लोकायुक्त और एसीबी के बोर्ड लगे हुए हैं तो क्या श्रीगंगानगर भ्रष्टाचार मुक्त हो गया? जब सरकारी तंत्र सरकारी कर्मचारियों पर लगाम नहीं लगा पाया तो बोर्ड लगाने से असामाजिक कंटक पर नियंत्रण लग पायेगा, जो पुलिस की शरणगाह में आकर पल रहे हैं।

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