Robots will now create new cities. demo photo

नई दिल्ली। उच्च तकनीक के सहारे जल्दी ही नये बसने वाले शहरों को बसाने का काम रोबोट्स को सौंपा जा सकता है। नये अध्ययन में उत्साह बढ़ाने वाले परिणाम सामने आ रहे हैं। इससे शहरों को प्रकृति के नियमों के अनुसार बसाया जा सकेगा, जिससे पर्यावरणविदों की चिंताएं भी दूर होंगी जो बदलते जलवायु को लेकर विश्व की सरकारों से खासे नाराज हैं।
बदली हुई विश्व की परिस्थितियों में जलवायु सहित कई अन्य मुद्दे हैं। इसका प्रमुख कारण यह रहा है कि प्रकृति के नियमों के अनुसार नये शहरों को नहीं बसाया जा सका है, जिसका विपरीत असर मनुष्य और जीव-जन्तुओं के जीवन पर मंडरा रहे खतरे के रूप में देखा जा सकता है। अब प्रकृति के बसाये हुए शहरों के डेटा को संकलित कर नये शहरों को बसाये जाने का सपना साकार होता दिखायी दे रहा है।
ब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज लंदन के मिर्को कोवाक ने कहा, ‘भविष्य के शहरों का निर्माण एवं रख-रखाव जमीन पर काम करने वाले एवं हवा में उड़ सकने वाले रोबोटों के जरिए संभव होगा जो इमारतों के शहरी पारिस्थितिक तंत्र एवं अवसंरचना के निर्माण, आकलन एवं मरम्मत के लिए साथ काम करेंगे।

कोवाक ने एक बयान में कहा, ‘प्रकृति से ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं कि इस तरह का सामूहिक निर्माण संभव है और इनमें से कुछ विचारों को सहयोग करने वाले ड्रोन बनाने और उनको संचालित करने के लिए लागू कर हम इस सपने को हकीकत में बदल सकते हैं।Ó टीम ने प्रकृति से ऐसे उदाहरण लिए जहां जीवों के समूह अपने घरौंदे बनाने में साथ काम करने के लिए विभिन्न युक्तियों का इस्तेमाल करते हैं। अनुसंधानकर्ता इस तालमेल के तरीकों का विश्लेषण कर अल्गोरिद्म तैयार कर सकते हैं जिससे रोबोट एवं ड्रोन के समूह, निर्माण कार्य के दौरान स्वत: ही एक साथ काम करें। यह अध्ययन ‘साइंस रोबोटिक्सÓ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के मुताबिक रोबोट जो कुछ वे करते हैं उन सबका डेटा इकठ्ठा कर सकते हैं और इसके जरिए वे अपने काम में सुधार कर सकते हैं।

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