उत्तर कोरिया ने अमेरिका के खिलाफ उगला जहर. file photo

वाशिंगटन। अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच में चल रही वार्ता कभी भी टूट सकती है। उत्तर कोरिया ने चेतावनी दी है कि अमेरिका अपना गैंगस्टर वाला रवैया छोड़कर उसको रियायत नहीं देता, वह अपने मिसाईल और परमाणु कार्यक्रम को एक बार फिर से चालू कर सकता है।
उत्तर कोरियाई उप विदेश मंत्री चोई सोन हुई ने मीडिया से वार्ता करते हुए कहा कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच हनोई में शिखर सम्मेलन के दौरान उत्तर कोरिया की स्थिति से अवगत करवाया गया था। उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया कि यूएसए के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन और विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के व्यवहार के कारण शिखर वार्ता सफल नहीं हो पाई।

वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री श्री पोम्पियो ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका उत्तर कोरिया के साथ बातचीत जारी रखना चाहता है और उसे उम्मीद हे कि किम जोंग उन परमाणु कार्यक्रम फिर शुरू नहीं करने की अपनी प्रतिज्ञा पर कायम रहेंगे। पोम्पेओ ने अपने रुख को नरम करने की इच्छा का कोई संकेत नहीं दिया।
बोल्टन ने व्हाइट हाउस के बाहर संवाददाताओं से कहा, उन्होंने अपने दक्षिण कोरियाई समकक्ष से बात की थी, लेकिन आगे जवाब देने से पहले अन्य अमेरिकी अधिकारियों से परामर्श करना चाहते थे।
पोम्पेओ ने संवाददाताओं को बताया कि उत्तर कोरिया ने गैंगस्टर शब्द का पहली बार इस्तेमाल नहीं किया। फिर भी संयुक्त राज्य उत्तर कोरिया के साथ बातचीत जारी रखना चाहता है। पोम्पेओ ने कहा, जैसा कि राष्ट्रपति ने कहा कि जब वह हनोई में थे, तो उन्होंने जो प्रस्ताव दिया था, वह उस स्तर तक बढ़ गया, जो स्वीकार्य था, बदले में वे जो मांग रहे थे, वह दिया।
पोम्पेओ ने कहा कि किम ने हनोई में ट्रम्प को कई बार प्रतिबद्ध किया है कि वह परमाणु या मिसाइल परीक्षण फिर से शुरू नहीं करेंगे।
दक्षिण कोरिया, जिसका उत्तर कोरिया के साथ जुड़ाव का एक महत्वाकांक्षी एजेंडा है, जो प्योंगयांग और वाशिंगटन पर निर्भर है, कम से कम उनके कुछ मतभेदों को हल करते हुए कहा कि यह बताना बहुत जल्दबाजी होगी कि चोए की टिप्पणियों का क्या मतलब हो सकता है।

विश्व को ध्यान है कि उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और चाइना के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गहरा रिश्ता है। श्री उन पिछले कुछ समय के दौरान कम से कम दो बार चाइना की यात्रा कर चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने चाइना पर शुल्क को काफी बढ़ाया हुआ है। समझा यही जा रहा है कि चाइना भी नहीं चाहता कि उत्तर कोरिया और संयुक्त राज्य के बीच में गहरा रिश्ता हो। इस समय उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा मददगार चाइना ही है। आरोप तो यह भी लगते रहे हैं कि चाइना ने ही उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक उपलब्ध करवायी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here