निहाल ने दिखायी ताकत, महिला शक्ति के नाम पर प्रियंका का भी नाम file photo

श्रीगंगानगर। लोकसभा चुनावों के लिए अब कभी भी शंखनाद बज सकता है। निर्वाचन आयोग ने कह दिया है कि चुनाव सही समय पर होंगे। इसके बाद श्रीगंगानगर संसदीय क्षेत्र में भी हलचल तेज होने लगी है। भाजपा की तरफ से एक बार फिर टिकट पर दावेदारी जताने के लिए निहालचंद ने रविवार को गोपीराम गोयल की बगीची में एक अभिनंदन कार्यक्रम का भी आयोजन कर डाला। यह कार्यक्रम फटाफट बनाया गया। इस तरह के कार्यक्रम संसदीय क्षेत्र के अन्य प्रमुख नगर में भी आयोजित हो सकते हैं। वहीं भाजपा की ओर से नये चेहरे पर भी चर्चा चल रही है और यह चर्चा महिला शक्ति के नाम पर प्रियंका बालाण के नाम पर हो रही है। युवा और महिला होने का लाभ तो उनको मिल ही सकता है साथ ही वे एक अरोड़ा परिवार की पुत्रवधू भी हैं, इसका भी समीकरण लगाया जा रहा है।
निहालचंद ने रविवार को गोपीराम गोयल की बगीची में अपने समर्थकों के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया। उनको भी ज्यादा भीड़ की संभावना नहीं थी। नहीं तो वे रामलीला मैदान में कार्यक्रम आयोजित करते अथवा किसी पैलेस का चयन करते। ऐसा उन्होंने नहीं किया। गोपीराम गोयल की बगीची में भाषणबाजी हुई। इसमें शहर के अनेक प्रमुख नेता भी शामिल हो गये थे।
निहालचंद के साथ पिछले कुछ सालों में बड़े विवाद जुड़ते रहे हैं। उनको केन्द्रीय मंत्रीमंडल से भी प्रधानमंत्री ने खराब परफोर्मेंस का हवाला देते हुए हटा दिया था। इसके बाद अपने राजनीतिक जीवन को बचाने के लिए वे संघर्ष करते हुए नजर आये हैं। उन्होंने स्थानीय रेलवे स्टेशन पर वाशिंग लाइन आरंभ करवायी। लॉड्रिंग भी चालू करवायी। कुछ अनियमित रेलगाडिय़ां भी चालू करवायीं।
सबसे बड़ी मांग जम्मू-मुम्बई रेलमार्ग पर गाड़ी चालू करने की थी। यह मांग पूरी नहीं हुई। उन्होंने दो-तीन गाडिय़ां चालू करवयीं, वह सप्ताह में सातों दिन नहीं चलने वाली हैं। इस कारण इन रेलगाडिय़ों का पूरा लाभ न तो जनता को मिलेगा ओर न ही निहालचंद को राजनीतिक रूप से। वे अखबारबाजी में रेलगाडिय़ों के फायदे तो गिना गये लेकिन हकीकत में यह रेलगाड़ी कितने लोगों को फायदा देगी, यह चुनावों से पहले ही पता चल जायेगा।
वहीं भाजपा में अब प्रियंका बालाण का नाम भी चर्चा में आ गया है। प्रियंका बालाण 2013 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की टिकट भी ले आयीं थीं किंतु उम्र कम होने के कारण उस समय वे चुनाव नहीं लड़ पायीं थीं। इस बार उनको अनूपगढ़ से टिकट नहीं दी गयी। नया चेहरा मैदान में उतारा गया।
प्रियंका बालाण का नाम इसलिए चर्चा में ज्यादा है क्योंकि वे महिला हैं। युवा हैं। उच्च शिक्षित हैं। पीहर पक्ष मेघवाल है जबकि वे पुत्रवधू अरोड़ा परिवार की हैं। युवा होने के कारण वे युवाओं को ज्यादा आकर्षित कर पायेंगी, ऐसा पार्टी के एक धड़े का मानना है और यही विचार के साथ उनके नाम को आगे किया जा रहा है। हालांकि टिकट उसी को मिलती है, जिसको पता होता है कि किस प्लेटफार्म से और किस खिड़की से लोकसभा के लिए टिकट बंट रही हैं। निहालचंद चार बार सांसद रहे हैं। उनको दिल्ली की लॉबिंग की ज्यादा जानकारी है, प्रियंका के मुकाबले। वहीं पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री नये चेहरे पर जोर देते हैं तो प्रियंका के नाम पर भी विचार होगा। वहीं चुनावों के लिए प्रो. ओपी महेन्द्रा और रावतसर के कैलाश मेघवाल भी नये कपड़े सिलवाकर अपनी फोटो तैयार कर चुके हैं। अब मुकाबला टिकट के लिए होना तय है।

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