नई दिल्ली। क्रिकेट विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया ने भारत को उसी की जमीं पर हराकर सीरिज को अपने नाम कर लिया। इस हार के साथ ही भारत की अब तक की गयी तैयारियों को गहरा झटका लगा है। टीम की हार से यह फिर साबित हो गया कि विराट कोहली के आउट होते ही दबाव शेष खिलाडिय़ों पर आता है और वे खिलाड़ी दबाव को झेलने में कामयाब नहीं हो पाते। महेन्द्रसिंह धोनी की कमी खली। युवा विकेटकीपर ऋषभ पंत काफी हड़बड़ी में दिखे और यही कारण रहा कि वे 16 गेंदों पर 16 रन बनाकर पैवेलियन लौट आये। ऑस्ट्रेलिया ने इस मैच को ही नहीं जीता बल्कि भारतीय जमीं पर ही उसको पराजित कर दिया।
भारतीय क्रिकेट टीम के उपकप्तान रोहित शर्मा ने एक बार फिर से जिम्मेदारी से भरी पारी खेली और वनडे क्रिकेट में अपने 8 हजार रन भी पूरे कर लिये। उनका कोई और साथी उसी तरह की जिम्मेदारी भरी खेलते हुए नजर नहीं आया। केदार जाधव ने 44 (57) रन बनाये, लेकिन वे टीम को कहीं भी मैच में वापिस लाते हुए नजर नहीं आये। जैसे-जैसे मेच आगे बढ़ रहा था, टीम हार की ओर जा रही थी। सबसे खराब शुरुआत शिखर धवन की गैर जिम्मेदाराना बल्लेबाजी से हुई। वे एक बार फिर से विफल हुए और 16 रन बनाकर आउट हो गये। कप्तान विराट कोहली फिर से नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने आये लेकिन वे भी अपने रंग में नहीं थे और मात्र 20 रन बनाकर आउट हो गये। ऋषभ पंत के बाद विजय शंकर भी मात्र 16 रन ही बना सके। रविन्द्र जडेजा तो अपना खाता भी नहीं खोल पाये। भुवनेश्वर कुमार ने मेच के अन्तिम क्षणों में संघर्ष किया और वे 46 रन बनाने में कामयाब हो गये। वे टीम को जीत की दहलीज पर नहीं ले जा सके। काफी दूर ही वे अपना विकेट गंवाकर वापिस आ गये।

ऑस्ट्रेलिया के कप्तान आरोन फिंच ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। जबरदस्त फॉर्म में चल रहे उस्मान ख्वाजा और फिंच ने पहले विकेट के लिए 14.3 ओवर में 76 रन जोड़कर ऑस्ट्रेलिया को शानदार शुरुआत दी। दोनों बल्लेबाजों ने भारतीय तेज और स्पिन गेंदबाजों का बखूबी सामना किया। दोनों ने सीरीज में तीसरी बार 50 रन से ज्यादा की साझेदारी निभाई।
ऑस्ट्रेलिया की पारी का पहला छक्का ख्वाजा ने 12वें ओवर में चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव की गेंद पर लांगऑन के ऊपर से मारा। भारत को पहली सफलता लेफ्ट आर्म स्पिनर रवींद्र जडेजा ने दिलाई। जडेजा को इस मैच में लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल की जगह एकादश में शामिल किया गया था। जडेजा ने फिंच को अपनी खूबसूरत गेंद पर बोल्ड कर दिया। फिंच ने 43 गेंदों पर 27 रन में चार चौके लगाए।
ख्वाजा ने दूसरे विकेट के लिए पीटर हैंड्सकॉम्ब के साथ 111 गेंदों पर 99 रन की साझेदारी की। ख्वाजा ने अपने 50 रन 48 गेंदों और 100 रन 102 गेंदों में पूरे किये। ख्वाजा का सीरीज में यह दूसरा शतक और सीरीज में चौथा फिफ्टी प्लस का स्कोर था। इस शतक से पहले सीरीज में ख्वाजा ने 50, 38, 104 और 91 रन बनाये थे। ख्वाजा ने अपने वनडे करियर के दोनों शतक भारतीय जमीन पर बनाये हैं।
भुवनेश्वर कुमार की गेंद पर ख्वाजा का कैच भारतीय कप्तान विराट कोहली ने लपका। ख्वाजा ने 106 गेंदों पर 100 रन की पारी में 10 चौके और दो छक्के लगाए। ऑस्ट्रेलिया का दूसरा विकेट 175 के स्कोर पर गिरा। आलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल आने के साथ ही जडेजा का शिकार बन गए। मैक्सवेल ने एक रन बनाया और उनका कैच भी विराट ने लपका। विराट दोनों कैच लपक कर इतना उत्साहित हुए कि उन्होंने दोनों बार गेंद को जमीन पर जोर से पटक दिया।

हैंड्सकॉम्ब अपना अर्धशतक पूरा करने के बाद मोहम्मद शमी का शिकार बन गए। हैंड्सकॉम्ब का कैच विकेटकीपर ऋषभ पंत के हाथों में गया। हैंड्सकॉम्ब ने 60 गेंदों पर 52 रन में चार चौके लगाए और ऑस्ट्रेलिया ने अपना चौथा विकेट 182 के स्कोर पर गंवा दिया। भारत ने सात रन के अंतराल में तीन विकेट निकालकर ऑस्ट्रेलिया के बढ़ते कदमों पर अंकुश लगा दिया।
जडेजा ने प्रभावशाली गेंदबाजी की और 10 ओवर में 45 रन देकर दो विकेट हासिल किये। कुलदीप ने अपने आखिरी ओवर में एश्टन टर्नर का विकेट लिया। टर्नर ने 20 गेंदों में 20 रन बनाये। कुलदीप ने 10 ओवर में 74 रन लुटाकर एक विकेट लिया। भुवनेश्वर ने मार्कस स्टॉयनिस को बोल्ड किया। स्टॉयनिस ने 27 गेंदों में 20 रन बनाये और ऑस्ट्रेलिया का विकेट 225 के स्कोर पर गिरा।
जसप्रीत बुमराह के पारी 48वें ओवर में ओवर में आश्चर्यजनक रूप से 19 रन गए जिसने ऑस्ट्रेलिया की लड़खड़ा गयी पारी को गति दे दी। रिचर्डसन ने 21 गेंदों में तीन चौकों की मदद से 29 और पैट कमिंस ने आठ गेंदों में दो चौकों के सहारे 15 रन बनाये। रिचर्डसन आखिरी गेंद पर रन आउट हुए।

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