भारत में पुलिस सिस्टम सबसे खराब : अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो. file photo

वाशिंगटन। अमेरिका के विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने भारत की आंतरिक जांच एजेंसी ‘पुलिसÓ को लेकर सवाल खड़े किये हैं। अमेरिकी कांग्रेस को पेश की गयी रिपोर्ट में कहा गया है कि हिरासत में मौत, मानवाधिकार का उल्लंघन और लोगों का अपहरण कर उनको हमेशा के लिए गायब कर देना वहां सबसे आसान है। पुलिस की मनमर्जी को भी कटघरे में खड़ा किया गया है।
श्री पोम्पियो ने पेश की रिपोर्ट में बताया है कि पुलिस हिरासत में मौत वहां सामान्य कारण बनकर रह गयी हैं। लोगों को गायब करना भी उतना ही सरल है। मानवाधिकार उल्लंघन को गंभीरता से ही नहीं लिया जाता। सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाने ओर साइट को ब्लॉक करने जैसे मामले सामने आते रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने ‘2018 में मानवाधिकार मामलों पर देशों की रिपोर्टÓ में भारत के जिक्र वाले भाग में कहा कि भारत सरकार ने कुछ गैर सरकारी संगठनों को विदेशी आर्थिक मदद पर प्रतिबंध लगाया।
रिपोर्ट में कहा गया, ”(भारत में) मानवाधिकार मामलों में पुलिस हिरासत में मनमानी हत्याएं, लोगों को जबरन गायब कराना, उत्पीडऩ एवं बलात्कार, मनमानी गिरफ्तारी एवं नजरबंद करना, जेल में मुश्किल हालात और जीवन को खतरा पैदा करने वाली स्थितियां शामिल हैं।ÓÓ
इसमें कहा गया है कि अन्य मानवाधिकार मामलों में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार, आपराधिक मामलों में जांच का अभाव या बलात्कार, घरेलू हिंसा, दहेज के कारण होने वाली हत्याओं एवं झूठे सम्मान की खातिर हत्याओं के मामलों के लिए जवाबदेही का अभाव शामिल है।
कांग्रेस की यह रिपोर्ट विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने जारी की।
रिपोर्ट में कहा गया, ”सेंशरशिप, सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए मानहानि कानून का इस्तेमाल और साइट को ब्लॉक करने के मामले शामिल हैं।ÓÓ

ध्यान रहे कि सांध्यदीप भी मानवाधिकार से संबंधित मामलों को लेकर पुलिस को कटघरे में खड़ा करता रहा है, जो सवाल आज तक सांध्यदीप उठाता रहा है, उन्हीं मुद्दों को अमेरिकी विदेशमंत्री ने भी विश्व की सबसे सशक्त केन्द्र कांग्रेस के समक्ष उठाया है। यह हालात बताते हैं कि भारत के गृहमंत्री रहे राजनाथसिंह अपना काम ईमानदारी से नहीं कर पाये हैं। मानवाधिकार के मूल्यों को उन्होंने समझने का प्रयास ही नहीं किया। आज तक हजारों ऑनर किलिंग में हत्याएं हो चुकी हैं, इसके बावजूद सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए गंभीर कानून बनाने की आवश्यकता ही नहीं जतायी। पुलिस जांच पर भी सवाल उठाये गये हैं, इस तरफ भी ध्यान नहीं दिया गया और पुलिस को अपनी शक्ति का माध्यम राज्य सरकार बनाये हुए हैं। अपने खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाने के लिए पुलिस की सहायता सरकार लेती रही हैं। इसी कारण पुलिस बेलगाम हो गयी।

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