संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेस un photos

संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेस की टिप्पणी निम्नलिखित है:

अपनी बात शुरू करने से पहले मैं केन्या के लोगों और वहां की सरकार के प्रति गंभीर संवेदना प्रकट करना चाहता हूं। केन्या में कल के भयावह आतंकी हमले में जानमाल का बड़ा नुकसान हुआ है। हम इस घटना की कड़ी निंदा करते हैं।

मैं पीड़ितों के परिवारों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करना चाहता हूं और इस हमले में घायल लोगों को अपनी शुभकामना देना चाहता हूं- उम्मीद है कि वे पूरी तरह और जल्दी अच्छे हो जाएं। संयुक्त राष्ट्र केन्या के लोगों, प्रत्येक स्थान पर प्रत्येक व्यक्ति के साथ है। आतंकवाद के खिलाफ हमारा संघर्ष जारी है- जोकि आज के विश्व में हमारे समाज के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

अब मैं आप सभी को नव वर्ष की शुभकामनाएं देता हूं-  2018 में आपने हमारा भरपूर समर्थन किया। एक वर्ष पहले अपने नए साल के संदेश में मैंने हमारी दुनिया के लिए रेड अलर्ट जारी किया था। 2019 की शुरुआत में भी मैं सिर्फ शब्दों के जाल नहीं बुनना चाहता। खतरा अब भी टला नहीं है। हम अब भी संकट का सामना कर रहे हैं।

सशस्त्र संघर्ष लाखों लोगों के लिए खतरा हैं और जबरन विस्थापन जारी है। गरीबी अब भी कायम है और लोग अब भी भुखमरी का शिकार हैं। असमानता भी लगातार बढ़ रही है। जलवायु संकट कहर बरपा रहा है। हम व्यापार संबंधी विवाद, उच्च ऋण, कानून और मानवाधिकारों के उल्लंघन, नागरिक समाज के लिए कम होती गुंजाइश और मीडिया की स्वतंत्रता पर होने वाले खतरों के साक्षी हैं।

इन सबका असर लोगों के रोजमर्रा के जीवन पर पड़ा है। वे बुरी तरह क्षत-विक्षत हो रहे हैं। यह उद्विग्न करने वाला क्षण है। लोगों का एक दूसरे से भरोसा टूट रहा है। इस समाज में राजनीतिक और सामाजिक, दोनों रूपों से ध्रुवीकरण होता है। देशों और वहां बसे लोगों में यह डर कायम हो रहा है कि उन्हें पीछे छोड़ दिया गया है क्योंकि विकास का लाभ सिर्फ कुछ भाग्यशाली लोगों को मिलता है।

इस संबंध में यह समझना मुश्किल नहीं है कि राजनैतिक संस्थाओं से लोगों का भरोसा किस तरह टूट रहा है। वे सरकार पर संदेह कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के मूल्यों पर प्रश्न खड़े कर रहे हैं। आइए स्पष्ट रूप से समझें: संयुक्त राष्ट्र पर भी विश्वास कम हुआ है।

ऐसी परिस्थितियों में हतोत्साहित होना बहुत आसान है। लेकिन पिछले वर्ष का अनुभव साबित करता है कि जब हम साथ मिलकर काम करते हैं और जब हम अपनी जिम्मेदारियां महसूस करते हैं तो हालात बदलते हैं।

विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमने प्रदर्शित किया है कि संयुक्त राष्ट्र मूल्यों को बढ़ावा देता है। आपकी प्रतिबद्धताओं से हमने सचमुच फर्क पैदा किया है। हम परिणाम केंद्रित हैं और संयुक्त राष्ट्र को अधिक जिम्मेदारी और सम्मानजनक बना रहे हैं।

हमें अपनी उपलब्धियों से प्रोत्साहित होना चाहिए। इसी के साथ हमें इस बात को समझना चाहिए कि अनेक लोग अब भी संयुक्त राष्ट्र को अप्रभावी, बोझिल और नौकरशाही से भरा हुआ समझते हैं। हमें अधिक फुर्तीला, प्रभावी, लचीला और कुशल संगठन बनना होगा। इसीलिए हम महत्वाकांक्षी तरीके से स्वयं में सुधार कर रहे हैं ताकि लोगों के लिए बेहतर तरीके से काम कर सकें।

आपके मार्गदर्शन और सहयोग के साथ नई संयुक्त राष्ट्र विकास प्रणाली तैयार की गई है जिसमें नई स्थानीय समन्वयक प्रणाली और देशीय दलों की नई पीढ़ी शामिल है। इस प्रकार सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयासों में हमें बेहतर तरीके से आपका सहयोग मिलेगा।

संगठन के शांति और सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया गया है ताकि उसके निवारण, मध्यस्थता तथा शांति स्थापना से संबंधित प्रयास सफल हों।

नई प्रबंधकीय क्षमताएं, संरचनाएं और कार्य पद्धतियां तथा पारदर्शिता, सरलीकरण और जवाबदेही के नए स्तर इन परिवर्तनों के आधार हैं। उम्मीद है कि इनसे संगठन का रूपांतरण होगा।

1 जनवरी को मैंने संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं के 200 से अधिक प्रमुखों को नए अधिकारों से संपन्न किया है। इससे लाल फीताशाही समाप्त होगी और नीति निर्माण को सेवा सुपुर्दगी के करीब लाएगी, जोकि सुधार का मुख्य उद्देश्य है।

सभी स्तरों पर भौगोलिक विविधता को महत्व देते हुए हम अपने कर्मचारियों के बीच क्षेत्रीय संतुलन में भी कायम कर रहे हैं। दुर्भाग्य से इसे पहले पूरी तरह नहीं समझा गया था। पिछले दो वर्षों से हम सुधार पर चर्चा और फैसले कर रहे थे। 2019 एक नए संयुक्त राष्ट्र को प्रस्तुत कर रहा है जो सभी के लिए कार्य करता है।

पिछले वर्ष की उपलब्धियों का यह अर्थ नहीं है कि हम आत्मसंतुष्ट हो जाएं। जिन लोगों के लिए हम काम करते हैं, उनकी जरूरतों और उम्मीदों को पूरा करने के लिए हमें अपने कार्य को तेज करना होगा। इसके लिए सबसे पहले हमें कूटनीति के क्षेत्र में अपने प्रदर्शन में सुधार करना होगा।

भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से अफ्रीका में कार्य करने के दौरान। हमें अफ्रीकी संघ के साथ अपनी भागीदारी को मजबूत करना होगा, चूंकि हम अफ्रीकी महाद्वीप में शांति स्थापित करने के प्रयास कर रहे हैं और माली एवं साहेल क्षेत्र, दक्षिणी सूडान, सोमालिया, मध्य अफ्रीकी गणराज्य और लोकतांत्रिक कांगो गणराज्य में समाधान तलाश रहे हैं।

पिछले वर्ष यमन पर स्टॉकहोम संधि ने होदीदा में भयंकर सैन्य संघर्ष पर विराम लगाया है। संघर्ष के कारण यमन में भीषण सूखे की आशंका थी। लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है ताकि यह सुनिश्चित हो कि विभिन्न पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं पर अडिग रहें और राजनैतिक प्रक्रिया के परिणामस्वरूप शांति कायम हो।

लीबिया में संयुक्त राष्ट्र ने जिस युद्ध विराम में मध्यस्थता की थी, वह अभी बना हुआ है। हमारे प्रयासों ने लीबिया की मुद्रा को स्थिर करने में मदद की है। इससे आर्थिक राहत मिली है और सुरक्षा संबंधी सुधार की संभावना बनी है। अब समय आ गया है, जब राजनैतिक स्थिरता कायम करने के लिए लीबिया के लोगों की मदद की जाए और ऐसे राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए स्थितियों का निर्माण किया जाए जोकि भविष्य में चुनावों के लिए मार्ग प्रशस्त करे।

सीरिया में युद्ध समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा। लाखों नागरिक विस्थापित हो गए हैं और मानवीय आपदा की आशंका से भयाक्रांत हैं, खास तौर से उत्तर-पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों के लोग। मेरे नए विशेष प्रतिनिधि उस एकमात्र समाधान के लिए प्रयासरत हैं : एक राजनैतिक मार्ग- सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2254 (2015) और जिनेवा कम्यून- जिसमें सीरिया के सभी लोगों के विचार सुने जाएं और शांतिपूर्ण एवं समान रूप से लोगों की शिकायतें सुनी जाएं।

अफगानिस्तान का संघर्ष निरंतर जारी है। मैं सरकार के वार्ता और संघर्ष विराम के प्रस्ताव सहित सभी हालिया शांति प्रयासों का स्वागत करता हूं। इसके अतिरिक्त नागरिक समाज और विभिन्न सदस्य देशों द्वारा भी कई कठिनाई भरी पहल की जा रही है।

दुर्भाग्य से शांति एवं सुरक्षा संबंधी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं, चाहे काकेशस और यूक्रेन हो या म्यांमार और इस्राइल-फिलिस्तान संघर्ष। सुरक्षा परिषद की एकता और सहयोग ऐसे गतिरोधों को दूर करने में सहायक होगा।

हम विश्व में संघर्षों को समाप्त करने के प्रयास कर रहे हैं, और हम समझते हैं कि स्थायी शांति तभी कायम होगी, जब समाज में सर्व सम्मति होगी, महिलाएं सभी शांति प्रक्रियाओं में पूर्ण भागीदारी करेंगी। इस तेजी से बदलती दुनिया में तटस्थ रहने का अर्थ है कि आप पिछड़ जाएंगे। इक्कीसवीं शताब्दी की तीन मुख्य चुनौतियों के मद्देनजर हमें 2019 में अपने प्रयासों को तेज करना होगा। सीधे शब्दों में कहें तो हमें अपनी रफ्तार को तेज, बहुत तेज करना होगा।

पहला, और सबसे महत्वपूर्ण है, जलवायु परिवर्तन से संघर्ष। वर्तमान और भविष्य के विश्व की यह सबसे बड़ी चुनौती है। भय का मार्ग स्पष्ट है: गर्म, तेज और बहुत गंभीर। विज्ञान स्पष्ट है। और स्थितियां उससे भी बदतर हो रही हैं, जैसा पूर्वानुमान था।

पिछले हफ्ते, एक अध्ययन में कहा गया कि पांच वर्ष पहले विश्व के वैज्ञानिकों ने जैसी भविष्यवाणी की थी, महासागरों का तापमान उससे 40 प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है। अगले दशक में हमें अपनी अर्थव्यवस्थाओं को अप्रत्याशित तरीके से रूपांतरित करना होगा, ताकि तापमान वृद्धि को 1.5o सेल्सियस पर रखा जा सके। 2020 तक पेरिस संधि के अंतर्गत सदस्य देशों को अपनी प्रगति का आकलन करना होगा और जिन लक्ष्यों पर उन्होंने सहमति जताई है, उन्हें पूरा करने के लिए नए वचन भी लेने होंगे। 2050 तक हमें शून्य विश्वव्यापी उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना होगा। इसके लिए दोतरफा प्रयास करने होंगे, उत्सर्जन को कम करना होगा और स्वच्छ, हरित ऊर्जा वाले भविष्य के लिए अवसर तलाशने होंगे।

इसीलिए मैं 23 सितंबर को जलवायु शिखर सम्मेलन का आयोजन करूंगा ताकि राजनैतिक नेतृत्व, व्यापारिक समुदाय और नागरिक समाज को एकजुट किया जा सके। हमें अधिक महत्वाकांक्षा की जरूरत है, न्यूनीकरण की महत्वाकांक्षा, अनुकूलन की महत्वाकांक्षा, वित्त की महत्वाकांक्षा और नवोन्मेष की महत्वाकांक्षा। मैं विश्व नेताओं से ऐसे समाधानों और प्रतिबद्धताओं की मांग करता हूं जोकि विश्वस्तरीय चुनौतियों के स्तर से मेल खाएं।

दूसरी तरफ जलवायु परिवर्तन के संबंध में पहल करने के अतिरिक्त हमें सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के अपने प्रयासों को भी व्यापक बनाना होगा। सरकार और अन्य लोगों के उल्लेखनीय प्रयासों के बावजूद 2030 की कार्यसूची हेतु जरूरी परिवर्तन अभी नहीं किए गए हैं।

हमें गरीबी और असमानता कम करने के कार्यों पर विशेष ध्यान देने और पर्यावरण संरक्षण करते हुए मजबूत और समावेशी अर्थव्यवस्थाओं के निर्माण पर ध्यान देना होगा, और साथ ही इन समाधानों के लिए हमें अधिक वित्त पोषण की जरूरत होगी।

इसीलिए वायु परिवर्तन सम्मेलन के बाद राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख सतत विकास पर उच्च स्तरीय राजनैतिक फोरम में हिस्सा लेंगे जोकि 2030 के बाद पहला ऐसा सम्मेलन होगा। इसके बाद महत्वपूर्ण बैठकों के साथ दो शिखर सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा जिसमें केंद्र में तीन मुख्य चुनौतियां होंगी- विकास हेतु वित्त पोषण, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के जोखिम। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप सितंबर 2019 की बैठक को स्मरणीय बनाएं ताकि जलवायु परिवर्तन के आवेग को रोकना, सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करना और भूमंडलीकरण को न्यायसंगत बनाना संभव हो।

तीसरा, नई तकनीक शांति और सतत विकास हेतु विश्वव्यापी प्रयासों में एक नई ऊर्जा का सूत्रपात कर सकती है। लेकिन हम इस बात का अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं कि उनके दूसरे गहन परिणाम क्या हो सकते हैं। यहां हमें पहल करने की जरूरत है।

चौथी औद्योगिक क्रांति ने स्वास्थ्य, शिक्षा, मानवीय सहायता और अन्य सभी के लिए असीम संभावनाओं के द्वार खोले हैं। इन लाभों के अतिरिक्त हमें श्रम बाजार के व्यवधानों, कृत्रिम खुफिया प्रणाली के शस्त्रीकरण और डार्क वेब की नृशंस गतिविधियों पर काबू पाना चाहिए।

इस वर्ष के अंत में डिजिटल सहयोग पर मैं एक उच्च स्तरीय पैनल का आयोजन करूंगा। यह पैनल डिजिटल असमानता को कम करने, डिजिटल क्षमता का निर्माण करने और यह सुनिश्चित करने का प्रस्ताव देगा कि नई तकनीक एक सकारात्मक शक्ति के रूप में हमारे पक्ष में हो।

इसके अतिरिक्त विश्व में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है मनुष्य जाति। यही मूल्य हमारा मार्गदर्शन करते हैं- संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सार्वभौमिक मूल्य, जो हमें एक दूसरे से जोड़ते हैं। शांति, न्याय, मानव गरिमा, सहिष्णुता और एकता।

आज विश्व में यही मूल्य खतरे में हैं। विचारधाराओं की लड़ाई जारी है और हमें अतीत की चिंतित करने वाली, शत्रुतापूर्ण ध्वनियां सुनाई दे रही हैं। अप्रिय विचार मुख्यधारा को विषाक्त कर रहे हैं। 1930 के सबक को हमें भूलना नहीं चाहिए। नफरत भरे संवाद, असहिष्णुता या दूसरे देश के लोगों के प्रति द्वेष की भावना के लिए गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। हमें हर वक्त, हर स्थान पर इससे संघर्ष करना है। लेकिन हमें इससे भी अधिक कार्य करने होंगे। हमें और गहराई से कार्य करने होंगे।

हमें जिन मूल्यों की रक्षा करनी है, उसके लिए हमें लोगों की व्यग्रताओं, भय और चिंताओं को समझना होगा। साथ ही हमें उन मूल कारणों को लक्षित करना होगा जिनके चलते तेजी से बदलते विश्व में लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।

मुझे पूर्ण विश्वास है कि हम हरित अर्थव्यवस्था की ओर आत्मविश्वास से बढ़ेंगे और चौथी औद्योगिक क्रांति का लाभ उठाएंगे।

लेकिन मुझे इस बात का भी यकीन है कि हमें सामाजिक सुसंगति, शिक्षा, लोगों के अनुकूल दक्षताओं, जिन लोगों के पिछड़ने की गुंजाइश है, उनके लिए सुरक्षा तंत्र बनाने में निवेश करने की जरूरत है। यह मत भूलिए कि कोयले की खदान में काम करने वाले मजदूरों, एसेंबली लाइन में काम करने वाले मजदूरों, दुनिया के अनेक लोगों, बेसहारा लोगों और संघर्ष के शिकार लोगों को यही भय सताता है कि वे विकास की दौड़ में पिछड़ गए हैं।

हमें मूल्यों- मानवाधिकारों और मानव गरिमा के लिए नए अभियान की जरूरत है, जिससे हम जुड़े हुए हों और जिसे प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का यथार्थ बनाए जाने की जरूरत है।

महासचिव के पद पर अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करते हुए तीन वर्ष पहले मैंने कहा था: ‘असुरक्षा के दौर में जब लोग अपने भविष्य के प्रति अनिश्चित हैं, जब राजनैतिक लोकप्रियतावादी, पुराने विचारों वाले राष्ट्रवादी या धार्मिक उन्मादी लोगों में भय और उद्विग्नता का संचार कर रहे हैं और लोगों का शोषण कर रहे हैं, उस दौर में संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सफलता इस बात में निहित है कि हम एक समान मूल्यों के साथ एक समान प्रतिबद्धता दर्शाएं।’

इस भावना के साथ आइए लोगों को बताएं कि हम उनकी परवाह करते हैं। अपनी करनी से अपनी कथनी को सत्य साबित करें। विश्व को आगे की दिशा में ले जाने के अपने प्रयासों को तेज करें और इस बात का ध्यान रखें कि इस विकास की दौड़ में कोई पिछड़ न जाए।

16 जनवरी 2019 को न्यूयार्क में महासभा के अनौपचारिक सत्र के दौरान

Courtesy :http://in.one.un.org

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