Official White House Photo by Shealah Craighead
President Donald J. Trump, speaking with President Enrique Peña Nieto of Mexico during a conference call, announces that the United States and Mexico have reached a trade agreement | file photo.

वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को एक और झटका लगा है। उनकी ही पार्टी रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने उनकी सरकार की विदेश नीति के खिलाफ वोट कर डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रस्ताव को विजयी बना दिया। अब यमन से अमेरिकी सेना की वापसी हो सकेगी। अब तक वहां संयुक्त राज्य की सेना सउदी अरब सेना की मदद कर रही थी।
एक सौ सदस्यों वाली अमेरिकी सीनेट में सत्तारुढ़ रिपब्लिकन पार्टी के 53 और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी की संख्या 45 है। वहीं दो सदस्य निर्दलीय हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिक पार्टी का बहुमत होने के बावजूद सीनेट में ‘राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियोंÓ में कटौती को लेकर प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव के पक्ष में 54 वोट हासिल हुए जबकि विरोध में मात्र 46 वोट ही डले।

इस संख्या को देखकर साफ हो जाता है कि सात रिपब्लिकन सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
डेमोक्रेटिक पार्टी चाहती थी कि यमन में सऊदी अरब नीत युद्ध से सेना को वापिस बुलाया जाये। राष्ट्रपति इसके पक्ष में नहीं थे। इस कारण वोटिंग करने का फैसला लिया गया और आखिर में प्रस्ताव पास हुआ कि यमन से संयुक्त राज्य की सेना को 30 दिनों के भीतर वापिस बुलाया जायेगा। अब यह प्रस्ताव डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाली प्रतिनिधि सभा में जाएगा। ऐसी संभावना है कि प्रतिनिधि सभा भी इसे पारित कर देगी।
व्हाइट हाउस ने इसे ”त्रुटिपूर्णÓÓ कदम करार देते हुए वीटो इस्तेमाल करने की धमकी दी है। इसके पारित होने से नया इतिहास रचेगा। यह राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों में सीधे कटौती करने के लिए 1973 युद्ध शक्ति प्रस्ताव को लागू करने के मकसद से कांग्रेस द्वारा पारित पहला कदम होगा।
ध्यान रहे कि कुछ ही दिन पहले ‘द गार्जियनÓ ने एक समाचार का प्रकाशन कर सनसनी फैला दी थी कि राष्ट्रपति के दामाद जोर्ड कुशनर के सऊदी अरब के विवादित युवराज मोहम्मद बिन सलमान के साथ रियल इस्टेट व्यापार में करीबी रिश्ते हैं।

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