हमारी विदेश नीति के कारण 15 में से 14 सदस्य मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के पक्ष में थे : स्वराज

नई दिल्ली। विदेशमंत्री ने शुक्रवार को राहुल गांधी के आरोपों पर करारा जवाब देने का प्रयास किया, जिसमें पाकिस्तानी आतंकवादी अजहर मसूद को प्रतिबंधित करने के प्रयास को चीन ने बाधित कर दिया था। फ्रांस के इस प्रस्ताव का अमेरिका और इंग्लैण्ड ने समर्थन किया था। रूस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी किंतु चीन ने चौथी बार इस प्रस्ताव को वीटो कर दिया था।
राहुल गांधी ने इस पर ट्विट कर सरकार की विदेश नीति को कटघरे में खडा करने का प्रयास किया था और सरकार की कूटनीति को विफल बताया था। विदेश मंत्री ने अपने ट्वीट में कहा, ”मैं मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति के तहत सूचीबद्ध करने के बारे में तथ्यों से अवगत कराना चाहती हूं । इस बारे में प्रस्ताव चार बार आगे बढ़ाया गया। ÓÓ

उन्होंने कहा कि साल 2009 में भारत संप्रग सरकार के तहत अकेला प्रस्तावक था । वहीं 2016 में भारत के प्रस्ताव के सह प्रायोजकों में अमेरिका, फ्रांस और अमेरिका शामिल थे । साल 2017 में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने प्रस्ताव आगे बढ़ाया था । सुषमा स्वराज ने कहा कि साल 2019 में प्रस्ताव को अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने आगे बढ़ाया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 में से 14 सदस्यों ने इसका समर्थन किया। इसके सह प्रायोजकों में आस्ट्रेलिया, इटली, जापान और बांग्लादेश जैसे देश शामिल थे ।
विदेश मंत्री ने कहा, ” मैंने इन तथ्यों को साझा किया है ताकि जो नेता इसे मसूद अजहर मामले हमारी राजनयिक विफलता बता रहे हैं, वे स्वयं देख लें कि साल 2009 में भारत अकेला था जबकि साल 2019 में उसे दुनिया भर से समर्थन प्राप्त है । ÓÓ
ध्यान रहे भारत में चुनाव का सीजन चल रहा है और इस समय देश-विदेश में होने वाली हर छोटी-बड़ी घटना चर्चा का विषय बन जाती जाती है। हर पार्टी अपने लाभ-हानि का गणित करने के बाद बयान जारी कर देती है और सोशल मीडिया पर इसके बाद हैश टैग का ‘युद्धÓ आरंभ हो जाता है। पता नहीं चलता कौन सी पार्टी हारी और कौन जीती।

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