सौ बात की एक बात : जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हैं, वह यह भूल जाते हैं कि दूसरों के लिए खोदे गये गड्ढे में इंसान पहले स्वयं गिरता है। यह बहुत पुरानी कहावत है लेकिन तारानगर थाना पुलिस ने नहीं सुनी होगी। उसका अनुभव नहीं होगा। अब अनुभव भी होगा। सबक भी मिला। यह सबक सभी को याद रखना चाहिये।

churu acb traip at taranagar police station.

श्रीगंगानगर। राजस्थान के चुरू जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने तारानगर पुलिस थाना के दो कांस्टेबल्स को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। इस मामले में एसीबी ने थानाधिकारी को क्लीन चिट दी है। उसको कांस्टेबल्स के इस कृत्य की जानकारी नहीं थी और एसीबी को प्राथमिक जांच में उनकी भूमिका का कोई लिंक भी नहीं मिला है।
चुरू भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रभारी आनंद स्वामी ने इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि अक्टूबर 2018 में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में 60 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की गयी थी। सत्यापन की कार्यवाही के दौरान 50 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। आज 25 हजार रुपये की प्रथम किश्त दी जा रही थी तो थानाधिकारी सुभाष ढील के रीडर राकेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

तारानगर में एसीबी का छापा, दो सिपाही गिरफ्तार

राकेश ने रिश्वत की राशि अपने साथी और थाने के ही कांस्टेबल मामराज को दी थी। बताया जाता है कि मामराज ही पुलिस थाने का मुनीम था। वह थानाधिकारी के लिए मंथली इक_ी करता था। यह राशि वह क्षेत्र के शराब ठेकों, अवैध अफीम-पोस्त की तस्करी करने वाले वालों अथवा थानाधिकारी के नाम पर जो भी वसूली हो सकती थी, करता था। वह ही थाने में होने वाले खर्च का हिसाब-किताब किया करता था। एसीबी के ही एक अन्य सूत्र ने बताया कि मामराज ही यह राशि क्षेत्र के डीवाईएसपी और एडीशनल एसपी तक पहुंचाता था।
थानाधिकारी सुभाष ढील से पूछताछ की गयी तो उसने अपने रीडर राकेश और अन्य कांस्टेबल मामराज के 50 हजार रुपये मांगने की कार्यवाही से खुद को अनभिज्ञ बताया है। वहीं श्री स्वामी ने बताया कि इस मामले की जांच की जा रही है। थानाधिकारी के कथन की जांच की जायेगी। पकड़े गये दोनों कांस्टेबलों से भी पूछताछ की जायेगी। यह भी पता चला है कि एसीबी की कार्यवाही के तुरंत बाद ही थानाधिकारी मौके से चले गये थे।

क्यों ली जा रही थी रिश्वत

तारानगर थाना पुलिस ने अक्टूबर 2018 में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करते हुए मनोज नामक युवक को गिरफ्तार किया था। वह गिरफ्तारी के बाद से ही जेल में है और पुलिस चालान पेश नहीं कर रही थी। मनोज की जमानत के लिए प्रयास किये गये थे। परिवारजन हाइकोर्ट गये। माननीय न्यायालय ने बिना चार्जशीट पेश हुए जमानत देने से इन्कार कर दिया। इस पर परिवारजन तारानगर पुलिस कर्मचारियों के सम्पर्क में आये थे और इन पुलिसकर्मियों ने सिर्फ चार्जशीट पेश करने के लिए ही 60 हजार रुपये की रिश्वत की मांग कर ली। जबकि सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग है 90 दिवस के भीतर आरोप पत्र दाखिल करने के लिए। लगभग 6 माह होने के बावजूद पुलिस इसलिए चार्जशीट पेश नहीं कर रही थी कि जब भी आरोपी की जमानत के लिए प्रयास होंगे तो वह उनके पास आयेेंगे। वह आये तो रिश्वत की मांग भी कर ली। फिर पकड़े भी गये। अब अपनी जमानत करवाने के लिए वह अब अदालत जायेंगे।

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