मुख्यमंत्री गहलोत 12 को आएंगे, मुश्किल होगी निहाल की राह. file photo

श्रीगंगानगर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आगामी 12 अप्रेल को श्रीगंगानगर आ रहे हैं। वे पार्टी प्रत्याशी भरतराम मेघवाल के समर्थन में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। उनके साथ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट भी होंगे। संदेश एकता का होगा। संदेश कार्यकर्ताओं में जोश भरने का रहेगा। वहीं भाजपा प्रत्याशी निहालचंद के खिलाफ पार्टी में ही भारी विरोध है। शनिवार को शहर से 30 किमी की दूरी पर पार्टी ने संक्षिप्त कार्यक्रम कर अपना स्थापना दिवस मनाया। वहां कुछ नेताओं की नाराजगी दूर करने का भी प्रयास हुआ, यह कितना कामयाब रहा, इस बारे सिर्फ चर्चा है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत श्रीगंगानगर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद वे दूसरी बार जिला मुख्यालय पर आ रहे हैं। कार्यकर्ताओं में जोश है। यह पहला मौका होगा जब प्रदेश का मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के पहले छ: माह में ही दो बार श्रीगंगानगर का दौरा करे। श्री गहलोत की चुनावी सभा भी होगी। कार्यकर्ताओं में जोश देखा जा रहा है। श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिले में कांग्रेस प्रत्याशियों को आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिली थी। श्रीगंगानगर जिले में सिर्फ सादुलशहर और श्रीकरणपुर विधानसभा सीट पर ही जीत हासिल हुई। श्रीकरणपुर सीट तो गुरमीतसिंह कुन्नर की व्यक्तिगत जीत कहा जा सकता है। वहां वे निर्दलीय के रूप में भी जीत चुके हैं। इस बार संभवत: सबसे अधिक वोट भी वही लेकर गये।
जिला मुख्यालय पर कांग्रेस प्रत्याशी अशोक चाण्डक हार गये किंतु राजकुमार गौड़ ने कांग्रेस को समर्थन दे दिया। वे अनौपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल भी हो गये हैं। हालांकि उन्होंने दो माह पहले एक अखबार से साक्षात्कार में कहा था कि वे किसी भी पार्टी में शामिल नहीं होंगे। इस तरह से श्रीगंगानगर में कांग्रेस के तीन विधायक हो गये हैं।
अशोक गहलोत जब भी आये हैं तो उन्होंने श्रीगंगानगर को कुछ न कुछ दिया है। जिला मुख्यालय पर निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज भी उनकी देन है, लेकिन यह अलग बात है कि दानदाता ने घोषणा करने के बाद अपने पांव पीछे खींच लिये और 6 सालों में भी एक दीवार वहां खड़ी नहीं हो सकी। पानी की डिग्गी नहीं बन सकी। मुख्यमंत्री से आशा है कि वे अपनी चुनावी सभा में मेडिकल कॉलेज के बारे में अवश्य कुछ घोषणा करें। जो हालात हैं उससे साफ है कि दानदाता मेडिकल कॉलेज नहीं बनाकर मामले को लटकाये रखना चाहता है और श्री गहलोत की यह जिम्मेदारी बन जाती है कि जिस मेडिकल कॉलेज की नींव को उन्होंने रखा था, उसका निर्माण भी वे ही आरंभ करवाएं। सचिन पायलट के साथ एक चुनावी जनसभा को संबोधित करने से पहले मुख्यमंत्री कांग्रेस प्रत्याशी भरतराम मेघवाल 12 अप्रेल को ही नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।
दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी निहालचंद ने चुनावी अभियान तो आरंभ कर दिया था किंतु भाजपा कार्यकर्ता ही उनके साथ नहीं दिखायी दिये थे। पार्टी में ही उनका विरोध है। कैलाश मेघवाल आरएसएस के नजदीकी हैं और वे तैयारी भी कर रहे थे। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने स्वीकार किया कि निहालचंद ने दो-चार कार्यकर्ताओं को छोड़कर पांच सालों में कार्यकर्ताओं की पूछ नहीं की।
पब्लिक में भी इस बात को लेकर गुस्सा है कि सत्तारुढ़ दल के सांसद होने के बावजूद निहालचंद उनके लिए बड़ी राहत नहीं ला पाए। चार बार उनको सांसद बनाया गया है, लेकिन उनकी लापरवाही श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं को भारी पड़ती है।
किसान का पुत्र हो या शहरी मतदाता, सभी को रोजगार चाहिये। रोजगार सृजन करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। सरकारी नौकरी नहीं मिले, लेकिन श्रीगंगानगर जिले में प्राइवेट सैक्टर को आकर्षित किया जाये, यह योजना तो बनायी जा सकती थी, जो नहीं बनायी गयी। प्रधानमंत्री से हम आशा करें कि वह एक-एक संसदीय क्षेत्र का हिसाब रखें तो यह सोचना भी बेईमानी होगी। यह संसदीय प्रतिनिधि की जिम्मेदारी थी, जिसको निभाने में वे कामयाब नहीं हो सके।

कांग्रेस नेता जगदीश जांदू और अशोक चाण्डक ने प्रेस नोट जारी कर बताया है कि कार्यकर्ता पार्टी के प्रदेश नेताओं का जोशिला स्वागत करेंगे। उनके कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए एक बैठक का भी आयोजन किया गया। इस बैठक में कृष्ण सिहाग पूर्व पार्षद, किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष बलकरण बराड़, सोहनलाल आईटी सैल प्रभारी, सुभाष सहारण सरपंच, इमीलाल सिगड़ सरपंच, हरनेक सिंह चन्दी, पूर्व पार्षद रवि बोस, टैम्पू युनियन प्रधान उस्मान खान, कपिल कासनिया, इमीलाल सहारण पूर्व चैयरमेन, रूपराम सहारण, कांग्रेेस नेता हेतराम सहारण, पालाराम, डॉ. बलदेव सिंह, मंगतु लुहार, गुरवीर बाठ, श्याम पुन्यानी, प्रेम भाटीया, पार्षद कश्मीरी इन्दौरा, एवं अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता मौजुद रहे

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