New Zealand at risk of foreign interference: intelligence service head. file photo

वेलिंगटन। न्यूजीलैण्ड में वर्ष 2017 में हुए संसदीय चुनावों में संभव है कि विदेशी शक्तियों ने प्रभावित करने का प्रयास किया हो और आगामी 2020 में प्रस्तावित चुनावों में भी वे ऐसा कुछ कर सकते हैं। यह आशंका न्यूजीलैण्ड की खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने एक रिपोर्ट में जतायी है।

सुरक्षा खुफिया एजेंसी के मुख्य कार्यकारी रैबेक्का किट्टरिज @Rebecca Kitteridge ने कहा कि राजनीति में सक्रिय नेताओं के कुछ विदेशी शक्तियों के साथ संबंध सामने आये हैं। वे अभी सुरक्षा कारणों से किसी देश का नाम नहीं लेना चाहते, किंतु यह सत्य है कि 2017 के चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप हुआ।
ध्यान रहे कि अमेरिका में भी वर्ष 2016 के राष्ट्रपति चुनावों में आरोप लगाया गया था कि वहां रूस की कुछ एजेंसियों ने हस्तक्षेप किया था। संयुक्त राज्य की एजेंसी एफबीआई के पूर्व प्रमुख अभी भी उस बयान पर कायम है, जिसमें विदेशी हस्तक्षेप का आरोप लगाया गया था। इस मामले में गठित की गयी एक समिति ने जांच की थी जिसे अटार्नी जनरल ने अध्ययन करने के बाद विदेशी हस्तक्षेप को दरकिनार कर दिया था।
न्यूज एजेंसी रायटर के अनुसार न्यूजीलैण्ड के खुफिया प्रमुख का मानना है कि वर्ष 2020 में भी कुछ तत्व ऐसे हैं जो चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। इसके लिए हमें ऑस्ट्रेलिया की तरह कानून बनाना होगा। वहां इस साल संसदीय चुनाव होने हैं।
विश्व में चीन उभरती हुई आर्थिक शक्ति है और वह कुछ देशों में होने वाले राजनीतिक चुनावों को प्रभावित करने के लिए धन का इस्तेमाल करता है। न्यूजीलैण्ड के एक राजनीतिक व्यक्ति पर 1 लाख न्यूजीलैण्ड डॉलर चीन के एक व्यापारी से लेने का आरोप लगा था। फिलहाल इसकी जांच नहीं हो पायी है।

प्रधानमंत्री जैसिका अर्डर्ण @Prime Minister Jacinda Ardern ने कहा है कि विदेशी हस्तक्षेप की जानकारी सामने आने पर वे संसदीय समिति के गठन का कार्य को प्राथमिकता देंगी। प्रधानमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि इसके लिए आवश्यक हुआ तो कानून भी बनाया जायेगा। चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं होगा। हम सुनिश्चित करेंगे कि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी हो।

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