Devotees form queue outside Durga

अयोध्या/श्रीगंगानगर/नईदिल्ली/मुम्बई/वाराणसी। चैत्र नववर्ष आज से आरंभ हो गये। देशभर में इसकी गूंज सुनाई दे रही है। देश के अलग-अलग राज्यों में इसको लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिरों में सुबह से ही लम्बी लाइन लग गयी और देवी दुर्गा की स्तुति और उनकी पूजा के लिए महिलाओं-पुरुषों में बराबर का उत्साह देखा जा रहा है।
देवी दुर्गा के विभिन्न अवतार की पूजा के लिए चैत्र माह में 9 रात्रि तक विशेष उपासना की जाती है। प्रथम दिन देवी के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा होती है। मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं, इसलिए इन्हें पार्वती एवं हेमवती के नाम से भी जाना जाता है। मां शैलपुत्री की आराधना से मन वांछित फल मिलता है। माता शैलपुत्री का स्वरुप अति दिव्य है। मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल है और मां के बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित है।

नवरात्रि द्वितीया : ब्रह्मचारिणी
नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरुप की आराधना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से भक्तों का जीवन सफल हो जाता है। मां भगवती दुर्गा की नौ शक्तियों का दूसरा स्वरूप है माता ब्रह्मचारिणी, ब्रह्मचारिणी ब्रह्म का अर्थ होता है तपस्या, यानी तप का आचरण करने वाली भगवती, जिस कारण उन्हें मां ब्रह्मचारिणी कहा गया है।
नवरात्रि तृतीया : चंद्रघंटा
नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा की तीसरी शक्ति माता चंद्रघंटा की अराधना की जाती है। मां चंद्रघंटा की उपासना से भौतिक, आध्यात्मिक सुख और शांति मिलती है। मां की उपासना से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
नवरात्रि चतुर्थी : कुष्मांडा
नवरात्र के चौथे दिन भगवती दुर्गा के कुष्मांडा स्वरुप की पूजा की जाती है। कुष्मांडा देवी के बारे में कहा जाता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब कुष्माण्डा देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए इन्हें कुष्माण्डा के नाम से जाना जाता है इसलिए ये सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं।
नवरात्रि पंचमी : स्कंदमाता
नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। गोद में स्कन्द यानी कार्तिकेय स्वामी को लेकर विराजित माता का यह स्वरुप प्रेम, स्नेह, संवेदना को बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
नवरात्रि षष्ठी : कात्यायनी
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। कात्यायन ऋषि के यहां जन्म लेने के कारण माता के इस स्वरुप का नाम कात्यायनी पड़ा। अगर मां कात्यायनी की पूजा सच्चे मन से की जाए तो भक्त के सभी रोग दोष दूर होते हैं।
नवरात्रि सप्तमी : कालरात्रि
मां दुर्गाजी की सातवीं शक्ति को कालरात्रि के नाम से जाना जाता हैं। दुर्गापूजा के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन ‘सहस्रारÓ चक्र में स्थित रहता है। उसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है।
नवरात्रि अष्टमी : महागौरी
मां दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। महागौरी ने देवी पार्वती रूप में भगवान शिव को पति-रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी, इस कठोर तपस्या के कारण इनका शरीर काला पड़ गया। इनकी तपस्या से प्रसन्न और संतुष्ट होकर जब भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगाजी के पवित्र जल से मलकर धोया तब वह विद्युत प्रभा के समान अत्यंत कांतिमान-गौर हो उठा। तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा।
नवरात्रि नवमी : सिद्धिदात्री
भक्तों नवरात्रि के नौवें दिन मां जगदंबा के सिद्धिदात्री स्वरुप की पूजा होती है। मां सिद्धिदात्री स्वरुप को मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है।
नवरात्रि की देशभर में धूम
श्रीगंगानगर में विनोबा बस्ती श्री दुर्गा मंदिर तथा इंदिरा कॉलोनी में जगदम्बा मंदिर सालों से लोगों की आस्था का केन्द्र रहा है। दोनों ही मंदिर में प्रात: से ही भक्तों की लम्बी लाइन लग गयी थी। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी अगले शनिवार को होगी। उस दिन 13 अप्रेल की तारीख है और उस दिन बैसाखी है। काफी सालों बाद यह मौका आया है जब बैसाखी और अष्टमी पूजा एक साथ होगी। बैसाखी के दिन ही किसान अपनी गेहूं की फसल की कटाई करते हैं। नये साल के लिए भोजन का बंदोबस्त करते हैं।
दुर्गा मंदिर के पुजारी पं. ऋषिराज शर्मा बताते हैं कि मंदिर में अगले आठ दिन तक विशेष पूजा की जायेगी। मंदिर पूरे दिन खुले रहेंगे। इन आठ दिनों में भक्तों की लम्बी लाइनें रहती हैं। मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है। देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों का शृंगार किया गया है।
गुजरात में भी नवरात्रि पर पूजा के साथ-साथ डांडिया उत्सव का भी आयोजन होता है। विभिन्न गु्रप डांडिया नृत्य पर नाचकर मां की स्तुति करते हैं। वे इन आठ दिनों को बहुत ही शुभ मानते हैं। उनका मानना है कि आठ दिनों में पूजा से देवी प्रसन्न रहती है और अन्न-पुत्र-धन देती है। मनोकामना पूर्ण करती है।
समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया है कि अयोध्या के बड़ी देवकाली मंदिर में प्रात: से ही लोगों की लाइन लगी हुई है। वे देवी मां दुर्गा के दर्शन और उनकी स्तुति कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
मुम्बई में मां मुम्ब्रा देवी मंदिर में विशेष पूजा हुई। लोगों ने प्रथम दिन प्रात: मंदिर में पहुंचकर आरती में भाग लिया। महिलाओं ही नहीं बल्कि बच्चों, पुरुषों, वृद्धों में भी बराबर का उत्साह रहा।
अयोध्या के देवी कुंड मंदिर में तो लोगों की सूर्य उदय से पहले ही लम्बी लाइन लग गयी थी। नवरात्रि के प्रथम दिन ही विशेष पूजा हुई। अयोध्या सभी हिन्दुओं के लिए आस्था का केन्द्र रहा है। भारतीय प्राचीन इतिहास बताता है कि हिन्दुओं के भगवान श्रीरामचंद्र जी ने यहीं जन्म लिया था। कालचक्र में अतिक्रमणकारी बाबर ने मंदिर को तोड़कर यहां मस्जिद का निर्माण किया था।

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