Carlos Monje, Jr., Twitter director of Public Policy and Philanthropy for U.S. & Canada and Facebook policy director Neil Potts sworn in before testifying at Senate Judiciary  Constitution Subcommittee hearing titled “Stifling Free Speech: Technological Censorship and the Public Discourse.” on Capitol Hill in Washington, U.S., April 10, 2019. REUTERS/Jeenah Moon(Courtesy)

वाशिंगटन। क्या सोशल मीडिया कंपनियां वास्तव में बोलने की आजादी-माध्यम उपलब्ध करवाने का धर्म निभा रही हैं? अगर हम इसका विस्तार से विश£ेषण करें तो यह निजता के निर्धारित मापदण्डों को भी पूरा नहीं कर पा रही हैं। कुछ लोगों की आवाज को दबा भी दिया जाता है और पैसे लेकर उसको पूरी दुनिया तक फैला भी दिया जाता है। यह इन कंपनियों का व्यापार बन गया है।

जो यह आरोप इन कंपनियों पर हैं, वह सांध्यदीप के नहीं है बल्कि विभिन्न देशों ने इन कंपनियों पर जो कार्यवाही की है, उसके तथ्य हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प स्वयं कह चुके हैं कि सोशल मीडिया अपना कर्तव्य नहीं निभा रही हैं। श्री ट्रम्प दुनिया के सबसे अमीर देश के राष्ट्राध्यक्ष हैं और वे आरोप लगा रहे हैं तो निश्चित रूप से उसमें कहीं न कहीं सच्चाई होगी।

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अब अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन सांसदों ने वही आरोप दोहराया है सोशल मीडिया की ट्विटर, फेसबुक और गूगल पर अविश्वास का अभियान चलाया जाना चाहिये। यह कंपनियां स्पीच फ्रीडम को न्यायपूर्ण लागू नहीं कर पा रही है।
समाचार एजेंसी रायटर्स ने समाचार दिया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका सीनेट की एक उप समिति के समक्ष पेश होकर ट्विटर निदेशक (पब्लिक पॉलिसी-अमेरिका-कनाडा) @Carlos Monje, Jr., Twitter director of Public Policy , @Facebook policy director Neil Potts फेसबुक के उनके समकक्ष नेली पोट्स पेश हुए। गूगल का प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था, उनके लिए कुर्सी को खाली रखा गया था। उप समिति “Stifling Free Speech: Technological Censorship and the Public Discourse.” सुनवाई कर रही थी। कमेटी के अध्यक्ष टेड क्रूज ने कहा कि समिति के पास अमेरिकियों की शिकायत है कि बड़ी टेक कंपनियां अपना काम ईमानदारी से नहीं कर रही हैं। वे पक्षपात करती हैं। उन्होंने कहा कि वे टेक कंपनियों की आजादी पर सुरक्षा पहरा नहीं लगाने चाहते लेकिन कुछ अन्य उपाय भी हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियां अगर भेदभावपूर्ण नीति अपनायेंगी तो निश्चित रूप से अविश्वास की भावना को नजरांदाज नहीं किया जा सकता। कंपनियां दुरुपयोग नहीं करें। रिपब्लिक सांसदों ने भेदभाव का आरोप लगाया। आगामी राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी कर रही डेमोक्रेट्स सांसद एलिजाबेथ वॉर्न ने कहा कि सोशल मीडिया सेंसरशिप लागू नहीं करे। टेक कंपनियों के अधिकारियों का कहना था कि अगर कुछ लग रहा है तो संभवत: कुछ तकनीकी कारण होंगे। गूगल ने एक लिखित बयान पेश किया। जिसमें कहा गया है कि उनकी कंपनी राजनीतिक रूप से तटस्थ है और रहेगी।

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