salasar balaji tample. file photo

बालाजी के सबसे बड़े भक्त कौन हुए थे ?अगर यह सवाल किसी बड़े से बड़े संत से भी किया जाये तो संभवत: वह भी इसका सही-सही उत्तर नहीं दे पायेंगे क्योंकि हनुमान जी तो चारों युगों में विराजमान हैं। आज भी जब घोर कलयुग है तो उस समय भी यही माना जा रहा है कि भगवान श्री हनुमान हमारे आसपास ही हैं। हमारी रक्षा करने के लिए वे अवश्य ही आयेंगे।

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार जब भगवान श्रीरामचंद्र जी ने पृथ्वीलोक पर अवतार लिया तो उस समय त्रेतायुग था। द्वापर से पहले ही त्रेता युग को आमंत्रित किया गया था। यह संभव हुआ था ऋषि गौतम महार्षि के अपनी पत्नी अहिल्या को श्राप देने के कारण। भारतीय ग्रंथों में श्राप देने के कारण अलग-अलग बताये गये हैं, लेकिन यह सत्य है कि गौतम महार्षि ने पत्नी अहिल्या को श्राप दिया था और कहा था कि भगवान श्रीराम जब पृथ्वी पर अवतार लेंगे तो वे ही उनका उद्धार करेंगे। यह सतयुग की कथा है और ऋषि ने गुस्सा शांत होने के बाद पत्नी के उद्धार के लिए त्रेतायुग से आह्वान किया था वे द्वापर युग से पहले ही आएं। उनके इस आह्वान पर युग परिवर्तित हो गया।

भगवान श्रीराम के त्रेता युग में अवतरित होते ही उनके भक्त श्री हनुमान भी पृथ्वीलोक पर आ गये थे। रामायण के अनुसार भगवान विष्णु का हर समय साथ पाने की चाहत में ही भगवान भोलेनाथ ने हनुमान जी का अवतार धारण किया था। दोनों ही एक-दूसरे के बिना स्वयं को अधूरा बता चुके थे और यह ज्ञान ब्रह्मा ने भगवान श्री बृहस्पतिदेव को भी दिया था।

सीता मैय्या ने सृष्टि एवं हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए भगवान श्री हनुमान से वचन लिया था कि वे चारों युगों में पृथ्वीलोक पर विराजमान रहेंगे। आज सालासर धाम में जो श्रद्धा है, उसको देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि आज भी पृथ्वीलोक पर अगर कोई ईश्वरीय रूप मौजूद है तो वह श्री हनुमान हैं।

कलयुग में सालासर गांव में बालाजी जी के भक्त हुए हैं बाबा मोहनदास जी। उनकी भक्ति की शक्ति ऐसी रही कि श्री बालाजी की मूर्ति वहां से काफी दूर गांव में एक किसान को खेती करते हुए खेत से मिली और इस मूर्ति को सालासर में मंदिर बनाकर स्थापित किया गया। उस मूर्ति को साक्षात् भगवान मानकर बाबा मोहनदास जी ने पूजा आरंभ की और उनके तप से आज सालासर मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र बन गया है। उनके तप का ही प्रताप है कि जो एक बार वहां गया है, वह बार-बार वहां जाने की इच्छा रखता है।

इसी कारण माना जाता है कि भगवान श्री राम के सेवक श्री हनुमान के अगर कोई सबसे बड़े भक्त हुए हैं तो वे बाबा मोहनदास जी हैं। जिनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ही आज वहां बालाजी खुद विराजमान हैं। बाबा मोहनदास जी ईश्वरीय चरणों में विलीन हो गये किंतु उनकी तपस्या के प्रताप का फल आज भी लाखों नहीं करोड़ों लोगों को हासिल हो रहा है।

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