क्यों सालासर धाम में जाना चाहता है हर हिन्दू?. file photo


बठिण्डा से जयपुर, बीकानेर से आगरा हाइवे अथवा श्रीगंगानगर से सीकर जाने वाले सभी लोगों का एक स्थान पर संगम होता है वह है रतनगढ़। रतनगढ़ वह स्थान है, जहां से कुछ ही दूरी पर आपको हजारों भक्त नजर आयेंगे। सैकड़ों लोगों की लम्बी लाइन आपको नजर आयेगी। इससे आपको अनुभव हो जायेगा कि आप सालासर धाम आ गये हैं। वो सालासर धाम जहां भगवान श्रीराम भक्त श्री हनुमान की हर समय अराधना होती है।


रेगिस्तान के धोरों में चुरू जिला बसा हुआ है। इस जिले की पहचान का मुख्य कारण यहां वो सालासर बालाजी मंदिर है, जो पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो चुका है। चार दशक पहले तक सालासर एक गांव हुआ करता था आज वह किसी भी जिला मुख्यालय की बराबरी करता है। वहां ऊंची-ऊंची ईमारतें बन चुकी है, जो हजारों श्रद्धालुओं के ठहराव का केन्द्र बनती है।


सालासर धाम पहले राजस्थान के एक हिस्से तक ही प्रसिद्ध था। सूचना तंत्र का विस्तार हुआ तो मंदिर की ख्याति राजस्थान के हर गांव-ढाणी तक पहुंची। लोग दर्शन करने के लिए पहुंचने लगे। इसके बाद मंदिर में मौजूद भगवान श्रीराम के भक्त श्री बालाजी की शक्ति स्थल की खबर देश-विदेश तक पहुंचने लगी और आज हर व्यक्ति की इच्छा है कि वह एक बार भगवान श्री हनुमान के भक्त मोहनदास जी की तपस्थली के एक बार दर्शन कर अपने जीवन को धन्य कर लूं।


शुक्रवार को हनुमान जयंती पर विश्व में अगर कहीं सबसे बड़ा मेला धार्मिक मेला लगा था तो वो
बालाजी सालासर धाम ही था। सालासर मंदिर में शुक्रवार को हजारों नहीं लाखों लोग पहुंचे हुए थे। भगवान श्री हनुमान के दर्शन करने के लिए। हर कोई भगवान से आशीर्वाद पाना चाहता था।


मेला तो सोमवार से ही आरंभ था और हर रोज हजारों लोग पहुंच रहे थे। चैत्र पूर्णिमा थी तो साल का सबसे बड़ा मेला लगा था। लाखों लोग श्रीराम-जय राम-श्रीराम का जाप करते हुए मंदिर में जा रहे थे और भगवान श्री हनुमान का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। सालासर मंदिर पहले आम आदमी के लिए खास था और अब खास के लिए भी खास हो गया है। हर साल बॉलीवुड के कलाकार यहां बालाजी के दर्शन करने के लिए आते हैं।


देश कर हर बड़ा नेता भी सालासर में दर्शन करने के लिए आता है। जो भी भक्त आता है, वह श्री हनुमान के अनन्य भक्त बाबा मोहनदास जी की समाधि स्थल तक भी जरूर जाता है। मोहनदास जी की भक्ति ने जो शक्ति दिखायी, उसी कारण आज लाखों लोग आये। हर साल भीड़ भड़ती जा रही है। मंदिर में व्यवस्थाओं और संसाधनों में भी बढ़ोतरी हुई है। बाबा मोहनदास जी का परिवार ही पूजा की जिम्मेदारी संभाल रहा है।

 

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