क्या माइक पोम्पियो और यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का दबाव काम कर गया?

न्यूयार्क। संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद ने 1 मई बुधवार को पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मोहम्मद मसूद अजहर अलवी को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया। चीन पिछले 10 सालों से लगातार बाधा बन रहा था। उसने अपने वीटो शक्ति को हटा दिया जिससे सुरक्षा परिषद के सदस्यों अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन का प्रस्ताव पास हो गया।

सुरक्षा परिषद की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मसूद अजहर को 1999 में 155 भारतीय विमान बंधकों के बदले में जेल से रिहा किया गया था। वह पहले हरकत उल मुजाहिदीन का सदस्य था। उसने जेल से रिहा होने के बाद जैश-ए-मोहम्मद नामक आतंकवादी संगठन की स्थापना की और वर्ष 2008 में आतंकवादियों की भर्ती के लिए पोस्टर अभियान चलाया। इस अभियान में पश्चिमी ताकतों के खिलाफ जेहाद का एलान किया गया और उस पोस्टर में मसूद अजहर का भी नाम था।

भारत, मसूद अजहर पर पुलवामा में आतंकी घटना का मुख्य साजिशकर्ता का आरोप लगाता है लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने अपनी आधिकारिक घोषणा में इस बात का उल्लेख नहीं किया है। भारत में हुई किसी भी घटना का जिक्र नहीं है। अजहर पर यह भी आरोप लगाया गया है कि वह अलकायदा से संबंध रखता था। वह कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन और तालिबान के भी सम्पर्क में रहता था जिस कारण उसको 17 अक्टूबर 2001 को सूचिबद्ध किया गया था।

यूएन की प्रेस विज्ञप्ति में भारतीय सशस्त्र सेना पर हुए हमलों का जिक्र नहीं है, इसका अर्थ यही है कि चीन ने वीटो शक्ति हटाने से पहले अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और भारत के साथ गुप्त समझौता किया। चीन ने पाकिस्तान में वन बेल्ट-वन रोड योजना के तहत काफी बड़ा निवेश किया हुआ है और इस कारण वह पाकिस्तान को किसी भी सूरत में नाराज नहीं कर सकता था।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने जिन आतंकवादियों को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया हुआ है, उनमें से करीबन 140 पाकिस्तान में रहते हैं। हाफीज सईद के बाद मसूद अजहर अलवी भी इसमें शामिल हो गया है। यह दोनों भारतीय खुफिया एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में टॉपर हैं।

चीन जो पिछले 10 सालों से मसूद अजहर को बचा रहा था, वह अचानक ही साधु कैसे बन गया? यह सवाल सभी लोगों के मन में कौंध रहा है। इस सवाल का उत्तर भी आपको पूरे तथ्यों के साथ देते हैं। वह साधु बना नहीं बल्कि उसको साधु की खाल पहननी पड़ी है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और संयुक्त रांष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के सख्त रुख के कारण।

एंटोनियो गुटेरेस पिछले सप्ताह ही चीन की यात्रा पर थे तो वहां उन्होंने चीन के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष झिंजियांग क्षेत्र में मुस्लिमों पर हो रहे चीनी अत्याचार का मामला उठा दिया था। संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रवक्ता ने इसके बाद पत्रकार वार्ता भी विशेष रूप से आयोजित की और श्री गुटेरेस की चीन यात्रा और वहां उठाये गये मानवाधिकार हनन के मामले को प्रमुखता से विश्व के सामने रखा।

चीन के मुस्लिम बहुल प्रांत में चीनी सेना का प्रकोप तो कई सालों से जारी था किंतु जब चीन ने अमेरिका-फ्रांस-ब्रिटेन के प्रस्ताव को वीटो किया तो 14 मार्च 2019 को अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों कनाडा, जर्मनी आदि देशों के साथ एक विशेष बैठक की और झिंजियांग में हो रहे मानवाधिकार का मामला प्रमुखता से उठा दिया। चेतावनी दी गयी कि अगर चीन हालात में सुधार नहीं करता है तो इस मामले को अन्य स्तर पर भी उनका गु्रप उठायेगा।

अमेरिका के विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने एक और बड़ा बयान जारी कर दिया। 28 मार्च 2019 को श्री पोम्पियो ने कहा कि चीन एक तरफ आतंकवादियों को बचाकर मुस्लिम प्यार को प्रदर्शित करता है तो वहीं दूसरी तरफ वह झिंजियांग में मुस्लिमों के मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है। अमेरिका का पहली बार सीधे चीन पर बड़ा हमला था।

माइक पोम्पियो और एंटोनियो गुटेरेस के दबाव के बाद आखिर में 1 मई 2019 को वह दिन आ गया जिसका इंतजार संयुक्त राज्य, भारत, ब्रिटेन आदि देश कर रहे थे। संयुक्त राष्ट्र संघ ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया। भारत में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा चुनावों में लाभ मिल सकता है किंतु श्री पोम्पियो ने सफलता का श्रेय लेने के लिए कंजूसी नहीं की है। एक ट्टिवट कर उन्होंने अमेरिका की बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है। साथ ही कहा है कि दक्षिण एशिया में शांति के लिए यह बड़ा कदम है।

नीचे संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है :

Mohammed Masood Azhar Alvi
In accordance with paragraph 13 of resolution 1822 (2008) and subsequent related resolutions, the ISIL (Da’esh) and Al-Qaida Sanctions Committee makes accessible a narrative summary of reasons for the listing for individuals, groups, undertakings and entities included in the ISIL (Da’esh) and Al-Qaida Sanctions List.

QDi.422
Mohammed Masood Azhar Alvi
Date on which the narrative summary became available on the Committee’s website:
1 May 2019
Reason for listing:
Mohammed Masood Azhar Alvi was listed on 1 May 2019 pursuant to paragraphs 2 and 4 of resolution 2368 (2017) as being associated with Al-Qaida for “participating in the financing, planning, facilitating, preparing, or perpetrating of acts or activities by, in conjunction with, under the name of, on behalf of, or in support of”, “supplying, selling or transferring arms and related material to”, “recruiting for”, “otherwise supporting acts or activities of”, and “other acts or activities indicating association with”:

Jaish-i-Mohammed (QDe.019).

Additional information:
Mohammed Masood Azhar Alvi founded Jaish-i-Mohammed (QDe.019) (JEM) upon his release from prison in India in 1999. Azhar was released from prison in exchange for 155 hostages held on an Indian Airlines flight that had been hijacked to Kandahar, Afghanistan. Azhar has also financially supported JEM since its founding.

The UN Security Council listed JEM on October 17, 2001, as being associated with Al-Qaida, Usama bin Laden, and the Taliban for “participating in the financing, planning, facilitating, preparing or perpetrating of acts or activities by, in conjunction with, under the name of, on behalf or in support of”, “supplying, selling or transferring arms and related materiel to” or “otherwise supporting acts or activities of” Al-Qaida (QDe.004), Usama bin Laden and the Taliban.

Azhar is also a former leader of the terrorist group Harakat ul-Mujahidin / HUM (QDe.008), aka Harakat ul-Ansar; most of these groups’ members subsequently joined JEM under Azhar’s leadership. In 2008, JEM recruitment posters contained a call from Azhar for volunteers to join the fight in Afghanistan against Western forces.

Related listed individuals and entities:
Jaish-i-Mohammed (QDe.019), listed on 17 Oct. 2001

Harakat ul-Mujahidin / HUM (QDe.008), listed on 6 Oct. 2001

 

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