Rajasthan Cm News
अलवर सामूहिक दुष्कर्म मामले में होगी पूरी जांच-गहलोत

जयपुर। अलवर के थानागाजी में सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ही नहीं बल्कि बहुजन समाजवादी पार्टी भी कांग्रेस सरकार की आलोचना कर चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तो एक चुनावी जनसभा में बसपा प्रमुख मायावती को भी इस मामले में घेरने का प्रयास किया। आज सोमवार को ऐसे संकेत मिले कि बसपा कांग्रेस सरकार से अपना समर्थन वापस ले सकती है, हालांकि इससे कांग्रेस सरकार अल्पमत में नहीं आयेगी।

थानागाजी में सामूहिक दुष्कर्म मामले को दबाने के आरोप कांग्रेस सरकार पर लगाये जा रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले की जानकारी मिलते ही अलवर पुलिस अधीक्षक तथा थानाधिकारी को हटा दिया।

यह भी पढ़ें : बसपा का समर्थन मिलता रहेगा-गहलोत

समाचार एजेंसी यूनिवार्ता ने अपने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि बसपा प्रमुख मायावती ने सरकार से समर्थन वापस लेने के संकेत दिये हैं।

अगर हम मौजूदा विधानसभा की स्थिति देखें तो कांग्रेस के सिम्बल पर ही 100 प्रत्याशी विजयी होकर आये थे। 200 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस के पास 100 विधायक तो हैं। साथ ही 10 से ज्यादा निर्दलीय अथवा छोटे दलों के विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है। इस तरह से कांग्रेस के पास आवश्यक 101 से ज्यादा संख्याबल मौजूद है।

चिंता तो कांग्रेस को भी नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि उसके पास 100 से ज्यादा विधायक मौजूद हैं तो सरकार का कोई खतरा नहीं है। वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आशा जतायी है कि सरकार को बसपा का समर्थन मिलता रहेगा।

कांग्रेस के पास जो संकट की घड़ी आने वाली है, वो है लोकसभा चुनाव के परिणाम।

श्रीगंगानगर से प्रकाशित होने वाले फाइटर न्यूज ने पिछले सप्ताह एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि फलौदी का सट्‌टा बाजार लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 20 से ज्यादा सीट पर विजयी होता मान रहा है। फलौदी का सट्‌टा बाजार देश-विदेश में अपनी सटीक भविष्यवाणी के लिए जाना जाता है। विश्व की प्रमुख संवाद सेवा बीबीसी भी फलौदी सट्‌टा बाजार पर रिपोर्ट को प्रकाशित कर चुकी है। इस तरह से फलौदी से सटोरियों द्वारा जारी की जाने वाली भविष्यवाणी को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता।

चिंता जोधपुर लोकसभा संसदीय सीट को लेकर भी है, जहां मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव गहलोत चुनाव लड़ रहे हैं। अगर वहां परिणाम कांग्रेस की आशा के विपरीत रहता है तो पार्टी में ही जारी गुटबाजी को बढ़ावा मिल सकता है।

कांग्रेस में आपसी खींचतान नयी नहीं है। विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी का नेतृत्व ही कई दिन तक यह तय नहीं कर पा रहा था कि मुख्यमंत्री की गद्दी किसको सौंपनी है। सभी गुट अपने-अपने दांव लगा रहे थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here