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शीत युद्ध के बाद हालात बदल गये

श्रीगंगानगर। एक समय था जब अमेरिका ने विएतनाम और रूस ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। दोनों के बीच कोल्ड वॉर का अभियान चला था। वह दौर समाप्त हो गया। विएतनाम को अमेरिका और अफगानिस्तान को रूस ने छोड़ दिया। इसके उपरांत अमेरिका ने राजनीयिक देश अफगानिस्तान से तालीबाज को खदेडक़र स्वयं कब्जा कर लिया था। फिर वहां पर कब्जा हटाया गया तो तालीबान फिर से आ गया।
सोवियत संघ का 90 के दशक में विघटन हो गया। इसके बाद कॉल्ड वॉर भी समाप्त हो गया। भारत में भी अनेक क्षेत्रीय दल उभर आये थे। इस तरह से राजनीतिक तस्वीर को बदल दिया गया था क्योंकि उस राजनीति के दौर को लोग समझने लगे थे।
अब मोदी का युग आया तो उन्होंने नयी शिक्षा नीति को लागू किया। राजनीतिक दलों के एक कार्य के अनेक चेहरे होते हैं और इसी तरह से शिक्षा विभाग की नयी नीति शामिल रही।
90 के दशक में कश्मीर में आतंकवाद को ‘उभारा’ गया। कांग्रेस ने ‘अफ जल गुरु’ को ही फांसी पर लटका दिया था। राजनीति इतना घिनौना चेहरा लेकर पैदा होती है। 9 फरवरी 2013 को उस समय फांसी दी गयी जब यह क्लीयर हो गया कि अब कांग्रेस पुन: सत्ता में नहीं आने वाली है। इसके उपरांत तेलांगना राज्य को बनाया गया।
आंध्र प्रदेश के दो भाग कर दिये गये थे। आंध्र पंजाबी का शब्द है और इसका अर्थ होता है दिल। कांग्रेस ने यहां पर दिल के दो भाग कर दिये थे।
दिल के रिश्ते को तार-तार करने के उपरांत कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गयी और नरेन्द्र मोदी की एंट्री हो गयी।
वर्ष 2014 से लेकर 2024 तक दो टर्म के दौरान मोदी ने यह दिखाने की कोशिश की कि देश अमीर होता जा रहा है जबकि सच्चाई यह थी कि लोग अपने घर गिरवी रखकर लोन ले रहे हैं। वर्ष 2021 के बाद से लेकर देश की जो हालत आप देख रहे हैं, उससे क्या पता चलता है कि संविधान को दो राजनीतिक दलों ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इतने छिद्र कर दिये थे कि हर कोई हैरान था।
मोदी ने स्वयं को एक ब्रांडेड के रूप में पेश किया और यह प्रयास कुछ समय तक सफल भी रहा किंतु धीरे-धीरे लोग समझ गये कि जो दिखाया जा रहा था, वह बिलकुल ही नहीं था। अब अमेरिका और रूस एक साथ आ गये हैं। जो युद्ध तीन सालों से दिखाया जा रहा था यूक्रेन में और कश्मीर घाटी को आतंकी हमलों से छलनीकिया जा रहा था। इस राजनीतिक ड्रामे के बाद भी सत्ताधारी दल के नेताओं को यह संवाददाता बिलकुल नहीं सुहाता है।

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