न्यूयार्क। अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा है कि वे नाटो और यूएन से बाहर निकल सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यूएन और नाटो का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा। इससे पहले यूक्रेन की सभी तरह की सप्लाई चेन को बंद कर दिया गया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, अमेरिका नाटो और यूएन की सदस्यता को त्याग सकता है। अगर उनकी यह सोच एक विचार बनकर लागू हो गयी तो दोनों संस्थाओं का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा।
दुनिया भर में यूएन के विभिन्न कार्यालय हैं और इनका वित्त पोषण अमेरिका करता है। वहीं नाटो जो यूरोपीय यूनियन-कनाडा के साथ अमेरिका का अंटलाटिक संधि महासंघ है, उस पर भी खतरा है।
अगर अमेरिका इस संधि से बाहर हो जाता है तो क्या होगा, ब्रिटेन की ताकत आधी से भी कम हो जायेगी। ब्रिटेन और ईटली अभी तक छुपे हुए रूस्तम थे और ट्रम्प की नीतियों की वजह से दोनों को सामने आना पड़ रहा है।
कोई भी संगठन, आंदोलन का आधार आर्थिक होता है और इन दोनों का संचालन अमेरिकी डॉलर के आधार पर चलाया जा रहा था और शेष देशों का कोई ज्यादा योगदान नहीं था। इसी तरह से यूएन का कार्यालय भी अमेरिका में है और हर साल हजारों वीआईपीज अमेरिका आते हैं और इनका भी खर्च सरकार यूएस डॉलर के रूप में वहन करती है। यह लाखों नहीं करोड़ों डॉलर बह जाते हैं।
इसके बावजूद अगर यूएन की भूमिका नहीं निभा पा रहा है और यूक्रेन-युद्ध में वह ब्रिटेन, यूक्रेन आदि को फटकार नहीं पिला पाया। यूरोपीयन यूनियन के खिलाफ सीधे तौर पर कोई भूमिका नहीं निभा पा रहा है तो इससे अमेरिका को निराशा होगी ही। तीन सालों के भीतर करीबन 300 बिलियन डॉलर की मदद अकेले अमेरिका ने की है।
यूरोपीय देश अगर अपने रंग के आधार पर ही अमेरिका का लाभ उठा रहे थे। वहीं अंग्रेजी भाषा जो यूएस की अधिकारिक भाषा बन गयी है, उसके बारे में भी अभी तक यूरोपीय यूनियन कोई निर्णय नहीं कर पायी है और स्कूलों में इस भाषा को अभी नहीं पढ़ाया जा रहा है।
इस तरह से पूरा दारोमदार अमेरिका पर निर्भर है और राष्ट्रपति ट्रम्प ने कह दिया है कि वे नाटो और यूएन से बाहर आ सकते हैं और वित्तीय सहायता भी बंद कर सकते हैं। इस तरह से एक बड़ा झटका होगा।