श्रीगंगानगर। दुनिया भर में इस समय खलबली मची हुई है। सामरिक, स्टॉक मार्केट, बैंकिंग, आईटी सहित सभी सैक्टर में जबरदस्त गिरावट को दर्ज किया जा रहा है।
बीती रात अमेरिका में ही करीबन 60 बिलियन डॉलर जो करीबन 6 लाख करोड़ या इससे अधिक होता है, का बाजार मूल्य कम हो गया। अगर 19 फरवरी के बाद देखा जाये तो यह 4 ट्रिलियन डॉलर अर्थात जो भारत के 150 करोड़ लोग एक साल में कमाते हैं, उसके बराबर की गिरावट महज 20 दिनों के भीतर हो चुकी है।
असल में दुनिया भर में काल्पनिक तेजी का शीशमहल तैयार किया गया था और इस महल को तैयार करने वालों में नरेन्द्र मोदी और उनके मित्र थे। इस शीशमहल के मंत्र को पहले भारत और फिर अमेरिका, फ्रांस आदि में लागू किया गया।
2021 में नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका की यात्रा की थी और उस समय बाइडेन-कमला हैरिस का प्रशासन था। हैरिस और मोदी ने मास्क पहनकर व्हाइट हाउस के टैरिस पर वार्ता की और ऐसा संदेश दिया जाने की कोशिश की गयी क्रीमिया पर चर्चा हो रही है। लेकिन उनके बॉडी लैंग्वेज से ही पता चल रहा था कि यह आभासी वार्ता है और इस वार्ता का रूस से कोई संबंध नहीं है।
इसके बाद अमेरिका के शेयर मार्केट में वर्चुअल तेजी का दौर आरंभ हुआ और बाजार दो गुणा या इससे भी अधिक हो गया। उसी तरह से जैसे भारत में शेयर बाजार में तेजी देखी गयी थी।
आखिरकार ट्रम्प प्रशासन की वापसी हुई और अब उसी तेजी को वापिस वस्तुस्थिति पर लाया जा रहा है। 20 दिनों के भीतर अमेरिका में 4 ट्रिलियन डॉलर अर्थात 350 लाख करोड़ रुपये का स्टॉक मार्केट कम हो गया है। यह अकेले अमेरिका की स्थिति है।
इसके अतिरिक्त अन्य बाजार जैसे भारत, वहां पर भी गिरावट को देखा जा रहा है। 86 हजार से 73 हजार अंक तक शेयर बाजार आ गया है। इस तरह से 13 हजार अंकों की गिरावट से शेयर बाजार की कैप भी कम हो गयी है। यह सब अमेरिका में ट्रम्प की वापसी से संभव हुआ।