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पर्यावरण और स्वास्थ्य को कैसे बेहतर बनाया जाये

श्रीगंगानगर। पर्यावरण और स्वास्थ्य आधुनिक युग के हॉट विषय हैं। जी-7 (जापान शामिल), अमेरिका, नई दिल्ली और श्रीगंगानगर को सबसे प्रदूषित इलाकों में माना जाता है। इस कारण स्वास्थ्य व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
दो अप्रेल को अमेरिका ‘मुक्ति दिवस’ मनाता है। इस दिन ऑटिज्म के बारे में लोगों को जागरुक किया जाता है। अब दो अप्रेल को ही भारत सहित दुनियाभर के देशों पर अमेरिका भारी टैरिफ भी लगा रहा है। इसमें यूरोपीयन यूनियन भी शामिल हैं।
इस्पात और स्टील को अमेरिका में आयात होने से पहले भारी भरकम टैक्स जिसको टैरिफज कहा जाता है, देना होता है। अब इसको अमेरिका का टैरेरिजम के खिलाफ एक अभियान भी कहा जा सकता है।
अमेरिका क्यों लगा रहा है टैरिफेज
असल में कारों के कारण इतना प्रदूषण नहीं होता जितना उन कंपनियों और उत्पादों के नाम के कारण होता है। इस बारे अधिक जानकारी दी ही नहीं जाती, क्योंकि अगर जानकारी दे दी गयी तो फिर बाजार बंद हो जायेगा। राजनेताओं की कमाई का जरिया खत्म हो जायेगा।
पहले एक बात स्पष्ट करना आवश्यक है कि पंजाबी, हिन्दी, अंग्रेजी और फ्रेंच भाषा ऐसी है, जिसको आती है, वही प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठ सकता है। चाहे वह दुनिया के किसी भी राज्याध्यक्ष बनना चाहता हो। पंजाब के बारे में कहा जाता है कि इसकी आबादी सिर्फ दो करोड़ है। उत्तरप्रदेश, दिल्ली, अमेरिका, यूरोप में इस आबादी का आकार 70 प्रतिशत से भी अधिक है।
अब कारें किस प्रकार प्रदूषित करती हैं, इसको भी जानना जरूरी है। प्रदूषण का मानक भारत स्टेज 1, 2, 3 आदि-आदि माना जाता है, जबकि ऐसा है ही नहीं।
अब हुंडई के बारे में पढ़ा जाये हुन देई, होंडा-हो न अण्डा (अण्डा नहीं होगा तो मादा मां कैसे बनेगी), जगुआर-जगे रो, टेस्ला-टी असला, टोयटा-तूं या तां तो, इस तरह से जिस जिस भी कार कंपनी का नाम पढ़ा जायेगा वह प्रदूषित करने वाला होगा। अब स्वीफ्ट-मारुति सबसे प्रदूषित कार है। इसका क्या अर्थ मां-रोती, सीवें फट/जब आदमी के सिर फटकर स्वाह हो जाता है उस समय संस्कार को पूर्ण माना जाता है और लोग अपने गंतव्य की ओर रवाना हो जाते हैं। (अब सर्दी हो या गर्मी, बरसात आंधी तूफान शव को आग लगाते ही कल्याण भूमि में तब तक नहीं बूझती जब तक वह स्वाह नहीं होती, इस दौरान मंत्र का जाप होता है फट स्वाहा)। मारुति में एक्सीडेंट के बाद मौत का आकड़ा सबसे ज्यादा है।

दो मई को क्यों बढ़ाया जायेगा टैक्स
भारत, यूरोप सहित दुनिया भर में टैक्स को बढ़ाया जा रहा है। अमेरिका के इस कदम को बाजार के खिलाफ माना जा रहा है, लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प दुनिया के स्वास्थ्य और वातावरण को बेहतर करना चाहते हैं। यह काम करना आसान नहीं है। पूरी दुनिया में हलचल मची हुई है कि किस तरह से इसको रोका जाये। ब्रिटिश शासन के अध्यक्ष प्रिंस चाल्र्स कहते हैं ट्रम्प आप हमारे साथ मिल जाओ, आपको सह अध्यक्ष बना देता हूं राष्ट्र मंडल का।
इस तरह से उनको दुनिया के अधिकांश देशों जो कॉमनवेल्थ देश हैं जिसमें कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, भारत जैसे गणराज्य भी शामिल हैं, का सह अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव भी ट्रम्प ने एकतरफा निर्णय लेते हुए ठुकरा दिया है। इस कारण ज्यादा हडक़म्प मच गया और आज सुबह हीथ्रो हवाई अड्डे पर आग लग गयी। वो पंजाबी में कहावत है न कि मेरी गड्डी नूं देखकर ओनूं आग लग गयी। उसी तरह से हीथ्रो में आगजनी की घटना हो गयी और आग के कारण पूरे दिन दुनिया का व्यस्त हवाई अड्डा बंद कर दिया गया।
टैरिफेज को 2 अप्रेल को लागू किया जायेगा। इस दिन अमेरिका ‘मुक्ति दिवस’ मनाता है। ब्रिटेन एक अप्रेल को अप्रेल फूल (नया वित्त वर्ष आरंभ होता है) मनाता है तो यूएसए मुक्ति दिवस। यह सोच का अंतर है।
अब ‘मुक्ति दिवस’ में ऑटिज्म (Autitsm/Auditsm)) मनाता है। अमेरिका में 70 प्रतिशत बच्चे ऑटिज्म से पीडि़त हैं। भारत में कितने प्रतिशत है, इसकी जानकारी सरकार के पास नहीं है क्योंकि जातिगत जनगणना करवाने से मोदी सरकार ने मना कर दिया है। सरकार तो जनगणना ही नहीं करवा रही। अपनी जिम्मेदारी से पांच सालों से भाग रही है।
अब श्रीगंगानगर में टीएसएम पहले से है और मारुति स्वीफट कार को ऑडी से जोड़ा गया है। श्रीगंगानगर जिला में वितरणायक का नाम ऑडी मोटर्स है। शीतल होंडा (Shee tal Honda) को देखा जाये तो यह शी टेल हो जाता है। शी टेल अर्थात नीचे आखरी मोघा। अब टोयटा के शोरूम का नाम है सोनक टोयटा (SONAK Toyta)। अब ऐश्वर्य राय और अनिल कपूर की फिल्म भी बना दी गयी ‘ताल’। इसका प्रचार प्रसार किया गया ताल से ताल मिला… अर्थात टेल से टेल मिला। दूसरी ओर जल संसाधन विभाग श्रीगंगानगर ने ए माइनर को जैड माइनर से जोड़ दिया। इस तरह से टेल से टेल मिल गयी।
ऑडी को टीएसएम से जोड़ दिया गया और इस तरह से ऑटिज्म का गढ़ बन गया श्रीगंगानगर। इससे दुनिया भर में बच्चे पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करना उनके बस की बात नहीं रही, क्योंकि जो शिक्षा उनको दी जाती है, वह उनको समझ नहीं आती। वो रॉंग नंबर मिल जाता है। इसको विस्तार से जानने के लिए तारे जमीं पर और पीके फिल्म को देखना और समझना बहुत ही जरूरी है। हालांकि लाल सिंह चड्ढा फिल्म भी बनायी गयी जो सुपर हिट नहीं हो सकी।
इस तरह से श्रीगंगानगर पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर बन चुका है।
इसको भले ही मेनेज किया जाता हो लेकिन सच यही है कि लॉकल श्रीगंगानगर ही नहीं बल्कि पूरा जिला ही इसमें शामिल है।
ब्रिटिश पौण्ड और एच1वी वीजा
अब दुनिया में सबसे ज्यादा बीमारी अगर दुनिया में है तो वह है बीपी और एचआईवी। एच 1 वी वीजा को एक नहीं बल्कि आई के रूप में संबोधित किया जाना चाहिये। क्योंकि दोनों का प्रारूप एक ही है।
यह आईटी सैक्टर या डॉक्टर्स को हासिल होता है। इस तरह से यह उच्चस्तर पर प्राप्त किया जाने वाला वीजा है। अगर इसको समाप्त कर दिया जाये तो दुनिया भर से एड्स समाप्त हो जायेगा और जो लोग तड़प-तड़प कर एचआईवी से मरते हैं, वे बंद हो जायेंगे।
इसी तरह से बीपी को ब्रिटिश पौंड के रूप में संबोधित किया जाना चाहिये। 90 के दशक में जी-बीपी की वैल्ल्यू 60 के आसपास थी। वह आज 110-133 रुपये के बीच में बिक रहा है। 90 या इससे पूर्व के दशक में देखिये कितने लोगों को बीपी रोग था। शायद न के बराबर। 90 आते-आते ही इसको लगातार बढ़ाया गया और आज युवाओं में भी बीपी रोग पाया जा रहा है। क्योंकि ब्रिटिश पौंड का खजाना भारत में भर रहा है। ब्रिटेन से धर्म परिवर्तन, धर्म प्रचार आदि के लिए अरबों रुपये आता है।
इस तरह से जो परोक्ष या अपरोक्ष रूप से ब्रिटिश संस्थाओं से जुड़ा है, उसको हृदय रोग अवश्य होगा। इसका सुधार यही है कि बुद्धा नाला प्रदूषण से मुक्त हो। ब्रिटेन और अमेरिका पौंड और एच1 वी वीजा को समाप्त कर नये सिरे अपने विचार रखे।
यूरो की कीमत भी बढ़ रही है
अब दुनिया में देखा जाये जिसने भी रियल इस्टेट के बाजार में प्रवेश किया है, उसको शुगर रोग अवश्य हुआ है। अगर नहीं हुआ है तो 100 प्रतिशत चांस है कि उसको होगा। अगर उसने नियम कायदों से परे जाकर कार्य किया है तो।
1 जनवरी 1999 को यूरोपियन कंट्रीज ने यूरो को लांच किया। इससे पहले उनकी करंसी का नाम था इको अर्थात सब एक है। ईश्वर एक है। ब्रिटिश राजशाही और अमेरिका के तत्कालीन शासकों ने मिलकर नयी मुद्रा लाँच करवायी जिसका नाम रखा गया यूरो। यू रो। तुम रोते रहो।
अब इसको देखा जाये तो यूरोपीयन यूनियन के अधिकांश देश पश्चिमी यूरोप में है। इसके बाद भी उसका नाम रखा गया यूरो। इस तरह से एक द्विभाषी शब्द का इस्तेमाल किया गया। अधिकांश देशों के संविधान में लिखा गया है कि यह संविधान द्विभाषी है। इसके कई अर्थ हो सकते हैं।
अब कानून बनाया जाता है तो उस समय उसका रूप अलग होता है और फिर सर्कूलर जारी किये जाते हैं कि पैरा नंबर 1 को पैरा नंबर चार पढ़ा जाये और चार को तीन। तीन में फैलाने शब्द को इस तरह से पढ़ा जाये। चौथी लाइन को दूसरी लाइन से संबंध होकर पढ़ा जाये। फिर सर्कूलर जारी होता है कि बिंदु संख्या 5 को आठ पढ़ा जाये। इस तरह से आदेश जारी होते हैं और लोगों को पता भी नहीं चल पाता कि हो क्या रहा है। वे तो नये कानून को अपनी नजरों के लिए पढऩा चाहते हैं।
नरेन्द्र मोदी ने 2014 के चुनावों में वादा किया था कि वे हर दिन एक कानून को समाप्त करेंगे। अब वह उल्टा काम कर रहे हैं। हर दिन या कानून ला रहे हैं।

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