श्रीगंगानगर। आम आदमी पार्टी के नेतागण अब मानने लगे हैं कि पंजाब के लुधियाना में बहने वाले बुद्धा दरिया को स्वच्छ करवाने में सरकार की रुचि नहीं है। अधिकारी और मंत्री जिम्मेदारी लेने से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
गत 12 सितंबर 2018 को संवाददाता ने चण्डीगढ़ जाकर धरना दिया था। उस समय कांग्रेस की सरकार थी। कोई मंत्री ज्ञापन लेने के लिए सचिवालय से बाहर नहीं आया और न ही किसी वरिष्ठ अधिकारी को भेजा गया।
इसी तरह भारत सरकार को लिखा गया था कि पत्रकार के रूप में कार्य करते हुए कई बरस हो गये हैं, कुछ संदिग्ध लोग आसपास घूमते हुए नजर आते हैं। सुरक्षा प्रदान की जाये। उस समय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि नायब तहसीलदार को सुरक्षा उपलब्ध नहीं करवायी जाती।
समय बीता और अब आधी से ज्यादा आबादी चाहती है कि मैं उनके बीच रहूं। आजाद के रूप में अपना जीवन व्यतीत करूं। फुटबॉल के लिए जो पहले रुचि थी, वह रुचि पुन: जागृत हो।
यह सब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, इवांका के कारण संभव हो पाया। पिछले कार्यकाल में ट्रम्प ने इवांका की एक कॉल पर 5 करोड़ महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए एक बड़ा बजट दिया था।
इसका लाभ यह हुआ कि जो लोग यह मान रहे थे कि यह पत्रकार अब कुछ दिन का मेहमान रह गया है, वह लोग अब आश्चर्यचकित हैं कि फिर से वह कैसे युवा बन गया है।
वही जोश फिर से बन रहा है जो 20 वर्ष की आयु में होता था।
इस तरह से इवांका ने जो प्रथम प्रयास किये थे, उसका लाभ यह हुआ कि दान की गयी राशि से वह दिन वापिस लौट आये। लोग मुझे लूटना चाहते थे और इवांका बचाना चाहती थी। इवांका की मेहनत रंग ले आयी। 2018-19 के बीच में पहली बार प्रियंका को देखा था और उसके बाद वह उसका दीवाना हो गया।
हालांकि इवांका इससे पहले 2017 में श्रीगंगानगर आये थे। उस समय उन्होंने मानवाधिकार पर यूएसए दूतावास की मदद से एक कार्यक्रम आयोजित करवाया था और इस कार्यक्रम में हालांकि आमने-सामने की वार्ता तो नहीं हो पायी थी किंतु सच यह है कि उस समय दो वक्त की रोटी के अलावा किसी और ध्यान हीं नहीं जाता था। लोग पास से निकल जाते थे और पता ही नहीं चलता था।
डीआईई जिसको अमेरिकन एड का भी नाम दिया गया, के कारण ईटली, ब्रिटेन, अमेरिका से जमकर पैसा पंजाब पहुंचता था और वहां से श्रीगंगानगर आता था। कुछ लोगों की सीधे अप्रोच अमेरिका, ईटली तक थी, इस कारण उनको वहां से भी धन मिल जाया करता था।
विदेशों से आये धन के माध्यम से बुद्धा दरिया में जहरीला रसायन मिलाया जाने लगा। श्रीगंगानगर में लाखों लोग प्रभावित हुए। हजारों लोग मारे भी गये। यह आकड़ा इतना खतरनाक है कि श्रीगंगानगर के पास पंजाब के अबोहर से एक रेलगाड़ी बीकानेर तक जाया करती है और उसका नाम ही कैंसर ट्रेन रख दिया गया था। पानी इतना जहरीला हो गया था।
बुद्धादरिया का पानी सतलुज नदी में पहुंचाया जाता था और वहां से पानी बहता हुआ श्रीगंगानगर आता था।
आज इंटरनेट का जमाना है और अब तो वेब 3.0 आ गयी है जो आपके सवालों का जवाब भी दे सकती है, इसका नाम एआई रखा गया है।
इस आधुनिक काल में सतलुज का पानी अशुद्ध हो चुका है। जहरीला हो चुका है और इसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। मृत पशुओं की चमड़ी को धोया जाता है और वह पानी पंजाब के मालवा तथा श्रीगंगानगर सहित राजस्थान के अनेक अन्य जिलों में पेयजल के रूप में इस्तेमाल होता है।
इंटरनेट के जमाने में सोशल मीडिया जहां हावी है, उस दौर में भी पंजाब सरकार ने अभी तक सतलुज नदी में विषैले पानी को मिलने से रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाये हैं। ऐसा नहीं है कि इसका उपाय नहीं है।
जहरीले पानी को फिल्टर कर खेत में विशाल टंकी बनाकर उसमें एकत्रित किया जा सकता है इससे बुद्धा दरिया का रास्ता भी नहीं बदलेगा। अब कोई काम करना हो तो उसको तो पूर्ण किया जा सकता है किंतु जब कोई काम करना ही नहीं है और भाषण के नाम पर कॉमेडी की जानी हो तो फिर इसका कोई रास्ता नहीं है।
आप के ही एक नेता का मानना है कि पंजाब सरकार इस मामले में गंभीर नहीं है। सत्ता बदल गयी, चेहरे बदल गये लेकिन हालात को बदलने को कोई तेयार नहीं है। अब तो अमेरिका-यूरोप से एड भी नहीं आनी है। करोड़ों डॉलर जो पंजाब पहुंचते थे, कुछ विशेष लोगों के हाथों में वो अब बंद हो रहे हैं। हालांकि कुछ का कहना है कि अप्रेल की किश्त आ गयी है लेकिन यूरोपीय देश अब अपने देश के नागरिकों के गुस्से को शायद बर्दाश्त नहीं कर पायेंगे। इस कारण मई वाली किश्त नहीं आयेगी। जो आना था वह आ गया।
कनाडा में भी प्रधानमंत्री बदल गये हैं। चुनाव भी अप्रेल में करवाये जा रहे हैं। कनाडा वाला रास्ता भी बंद हो गया है।
इस तरह की स्थिति में पंजाब सरकार कितने दिनों तक लोगों की आवाज को दबाये रखेगी। शायद ज्यादा दिन तक नहीं। लोग भी समझने लगे हैं कि सरकार उनका ध्यान भटकाव करवाना चाहती है। उनके लक्ष्यों से अलग करना चाहती है।