न्यूयार्क। अगर दुनिया में दवा उद्योग निर्यात की बात की जाये तो यूरोप के साथ-साथ भारत भी टॉप-5 में शामिल है। पहला स्थान जर्मनी का रहता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस्पात, कार और कलपुर्जों पर अतिरिक्त टैरिफस लगाने के बाद घोषणा की है कि वे अब दवा उद्योग पर अतिरिक्त टैक्स लगायेंगे। अगर ऐसा होता है तो निश्चित रूप जर्मनी और भारत सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि वे दवा उद्योग पर टैक्स लगा रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा वे सभी देशों पर उतना ही लगायेंगे जो देश उन पर लगाते हैं।
ट्रम्प के इस बयान से दवा उद्योग में भी खलबली मच गयी है। जो जानकारी सामने आयी है, उसके अनुसार यूरोपीय संघ सबसे बड़ा निर्यातक है और अमेरिका उसकी पहली पसंद होता है। वहीं जर्मनी, स्वीट्रजलैण्ड और भारत टॉप 3 में शामिल हैं। इस तरह से ट्रम्प अगर दवा उद्योग पर टैक्स लगाते हैं जिसको टैरिफस कहा जाता है, तो इससे भारतीय दवा उद्योग पर व्यापक असर होगा और निर्यात कम होने से भारत सरकार का बजट भी कमजोर होगा।
हालांकि जिस प्रकार मोदी सरकार का रवैया रहा है, उससे नहीं लगता है कि वह अमेरिका के टैरिफस से प्रभावित होने वाला है। हालांकि उप विदेश मंत्री को फिर से दूत बनाकर प्रधानमंत्री तक ट्रम्प ने भेजा था किंतु उस वार्ता में भी कोई प्रगति नहीं हो पायी है।