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ट्रम्प ने क्यों कहा, हम जो देते हैं वह वापिस नहीं आता?

श्रीगंगानगर। अगर हम इतिहासकारों की बात को मानें तो 1947 को भारत गणराज्य स्वतंत्र हो गया था और अपना कानून यहां पर लागू हो गया था। लेकिन आज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया।
भारत गणराज्य में आज बैंकिंग पीओ का परिणाम जारी हुआ। राष्ट्रपति ट्रम्प की इसके बाद प्रतिक्रिया हुई कि हम जो भारत भेजते हैं, उसकी कभी वापसी नहीं होती किंतु अन्य देश अर्थात यूरोपीय देश जितना देते हैं उससे ज्यादा वापिस ले लेते हैं।
अगर भारत स्वराज बन गया था तो फिर भ्रष्टाचार समाप्त क्यों नहीं हुआ? अब इस सवाल की पड़ताल की जाये तो सामने आता है कि अमेरिका के पास रसद विभाग, नगर निकाय और बिजली विभाग आज भी है। इसी तरह से फ्रांस के पास भारत का न्याय विभाग है। पुलिस विभाग ब्रिटेन के पास है और ईटली के पास बैंकिंग सैक्टर है।
दंत विभाग भी ईटली के पास है। इस तरह से दंत और बैंकिंग विभाग, जो दिखाई देते हैं, वह ईटली के पास है। आरएसएस के पास बीएसएफ, सीआरपीएफ आदि विभाग हैं। इस तरह से वह अद्र्धसैनिक बलों का मालिक है। व्यापार जगत जो है वह चीन, कांग्रेस और बीजेपी के बीच में बंटा हुआ है। इस तरह से अन्य विभाग अन्य गणराज्यों की सरकारों के पास है।
अगर आईवीएफ अर्थात ई-प्रेग्रेंसी अर्थात सूर्यवंशी संतान प्राप्त करने के लिए अगर कार्यवाही होती है तो वह पहले रसद विभाग के पास जायेगी, वहां से अनुमति मिलने के बाद ही फाइल को अमेरिका भेजा जायेगा और वहां से कानून सम्मत ई पे्रग्रेंसी होती है। अब रसद विभाग के पास जो फाइल जाती है, वह किसी भाषा में लिखी गयी होती है, यह अलग विषय है।
ट्रम्प का विषय शिक्षा सुधार है। उन्होंने सुधार के लिए शिक्षा विभाग को बंद कर दिया और हॉवर्ड यूनिवर्सिटी तथा अन्य को मिलने वाली सरकारी सहायता भी समाप्त कर दी। इस तरह से उन्होंने एक बड़ा कदम उठाया है। इस तरह से शिक्षा अब पूरी तरह से पैरेंट्स, स्कूल और बच्चों के बीच में आपसी मामला हो गया है। सरकारी हस्ताक्षेप पूरी तरह से बंद कर दिया गया।
ट्रम्प के बयान को लेते हैं तो सामने आता है कि उन्होंने कहा, हम जो भेजते हैं, वह वापिस नहीं आता और यूरोप वाले अपना हिस्सा बढ़ाकर वापिस ले जाते हैं। इस तरह से यह कहा जा सकता है कि ईस्ट इंडिया कंपनी का साम्राज्य अभी समाप्त नहीं हुआ है। वह आज भी जारी है। पहले ब्रिटेन दिखाई देता था अब उसके साथ यूरोप और विश्व के अनेक विकसित राष्ट्र भी शामिल हैं।

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