न्यूयार्क। अमेरिका की हॉवर्ड यूनिवर्सिटी, जो विश्व में एक मुकाम हासिल करने की प्रथा का संचालन करती है/थी, को मिलने वाली सरकारी सहायता बंद कर दी गयी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सहायता राशि को बंद कर दिया है। यह राशि सालाना 344 मिलियन यूएसडी थी।
हॉवर्ड यूनिवर्सिअी की स्थापना करते हुए इसे अश्वेत लोगों की एक रिसर्च एजेंसी बनाया गया था, जिससे हर साल 70 डॉक्टरेट दीक्षा प्राप्त करते थे। इसको इस तरह से भी कहा जा सकता है कि यह दिल्ली की नेहरू विश्वविद्यालय था, जहां पर सरकारी सहायता से लोग दिल्ली में आकर हॉस्टल का इस्तेमाल करते हैं। वहां पर भी वामपंथी धारा के लोग बाहर निकलते थे।
हावर्ड यूनिवर्सिटी को आर-1 का दर्जा प्राप्त था। इससे यही पता लगता है कि यह वामपंथी विचारधारा वालों का एक प्रमुख संस्थान था और हर साल सरकार इसको सरकारी सहायता के लिए रूप में 344 मिलियन सहायता राशि दे रही थी।
यह एक बड़ी रकम है जो इसको एक बड़ा विश्वविद्यालय संचालन करने में मदद करती थी। इस विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने वालों को दुनिया सम्मानजनक नजर से देखती थी किंतु उनको नहीं पता था कि इसको 344 मिलियन डॉलर अमेरिका की सहायता हर साल मिलती है और यह राशि दुनिया भर में वामपंथी विचारधारा को मजबूत करती है।
वामपंथी विचारधारा के खिलाफ इसको एक बड़ा स्टॉक बताया जा रहा है जो अल्पसंख्यक समुदाय ब्लैक के लिए एक विश्वविद्यालय का दर्जा होने का दावा करता था।
अब इस विश्वविद्यालय को अपने रिसर्च, अपने संचालन करने के लिए अपने स्तर पर ही प्रयास करने होंगे। इसके अतिरिक्त अनेक अन्य छोटे-बड़े विश्वविद्यालय और भी हैं जो सरकारी सहायता से चल रहे थे। इन सभी की सहायता राशि को बंद करते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर दिया।
इसी तरह से एक अन्य विश्वविद्यालय है, इसको 400 मिलियन से ज्यादा की राशि दी जा रही थी। इस यूनिवर्सिटी का नाम केश वेस्टर्न रिजर्व रखा गया। यह विद्यालय भी हर साल सैकड़ों छात्रों को शामिल करता था और सरकार से 400 मिलियन डॉलर की सहायता राशि प्राप्त करता था। गैर सरकारी विश्व विद्यालय को सरकारी सहायता प्राप्त हो रही थी। इसमें चिकित्सा जगत के डॉक्टर भी बाहर आते थे।
यह दोनों विश्वविद्यालय आर-1 की उपाधि प्राप्त किये हुए थे और वामपंथी विचारधारा का प्रसार करते हुए डाई कार्यक्रम को जोर-शोर से चला रहे थे। केश वेस्टर्न रिजर्व का संचालन रोम से हो रहा था। इस तरह से चिकित्सा शिक्षा, इंजीनियरिंग और अन्य विषयों में डॉक्टरेट की पढ़ाई करवायी जा रही थी। इसके लिए विदेशी लोगों को स्कॉलरशिप भी दी जा रही थी। यह सब अब बंद हो गयी है। विदेशी फंडिंग पर ट्रम्प प्रशासन ने पहले ही 6 माह के लिए रोक लगायी हुई है और अब कार्यकारी आदेश जारी कर विश्वविद्यालयों को मिलने वाली सरकारी सहायता भी बंद कर दी गयी है।