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ऑटिज्म के लिए राष्ट्रपति टेरिफ रोल आउट करेंगे, भारत ने बैंकों को जारी किया था लाइसेंस

श्रीगंगानगर। विश्व में ऑटिज्म बच्चों की संख्या 1 प्रतिशत से ज्यादा है अर्थात यह 8 करोड़ या इससे कहीं ज्यादा है। ऑटिज्म से पीडि़त लोगों को राहत और जागरुकता के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज मुक्ति दिवस मना रहे हैं। वहीं वे आज टैरिफज से संबंधित आदेश जारी करने वाले हैं। इसे पारस्परिक व्यापार रण में भी बदलने वाले हैं।
फिल्मी कलाकार का एक डॉयलॉग काफी प्रसिद्ध हुआ था, जॉनी, जहां हम खड़े होते हैं, लाइन वहीं से आरंभ होती है। इसी तरह से ऑटिज्म है। यह वो शक्ति है कि जहां पर दूसरे लोग बात को खत्म करते हैं, वहीं से ये ऑटिज्म शक्ति सोचना आरंभ करती है।
भारत में 130 करोड़ से ज्यादा जनता है तो इसके बाद भी ऑटिज्म बच्चों की संख्या डेढ़ से दो करोड़ के बीच में है। अमेरिका में 1.7 करोड़ बच्चे ऑटिज्म हैं। हाल ही में इन बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए यूएसए ने शिक्षा विभाग ही समाप्त कर दिया।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने बच्चों के बीच में बैठकर शिक्षा विभाग को तुरंत बंद करने के आदेश जारी किये। पहले 50 दिनों के भीतर उनका यह आदेश आया था।
वहीं हम भारत देखें तो ऐसे बच्चों की संख्या का सही अनुमान लगा पाना आसान नहीं है क्योंकि इन विशेष बच्चों के रिकॉर्ड बारे जानकारी ही हासिल नहीं की गयी।
भारत सरकार ने वर्ष 2016 में कुछ प्राइवेट बैंकों को लाइसेंस अवश्य दिये। इनके नाम देखिये-ए-यू स्मॉल फायनेंस बैंक, यू फॉर- उत्कर्ष स्माल फायनेंस बैंक, टी फॉर द करूर व्यास्या स्मॉल फायनेंस बैंक,आई फॉर आईडीएफएस फस्र्ट बैंक, एस फॉर सूर्याेदय स्माल फायनेंस बैंक, के स्थान पर वैकल्पिक शब्द बी लिया गया। इस कारण बंधन बैंक को भी लाइसेंस जारी कर दिया गया।
A- AU Small bank
U- Utkarsh Small Finance Bank
T : THE KARUR VYSYA BANK LIMITED
i : IDFC First Bank
S : Suryoday Small Finance Bank
M /B: Bandhan Bank

इस तरह से देखा जा सकता है कि ऑटिज्म बच्चों को प्रभावित करने के लिए भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक की सहमति के साथ इन बैंकों को लाइसेंस जारी किये। ये फायनेंस कंपनियां थीं और इनको बढ़ा किया गया। तहसीलदार को उपखण्ड अधिकारी या एडीएम बनाया गया। अब इनका टर्न ओवर कम था तो इनको स्मॉल बैंक की उपाधि देते हुए लाइसेंस जारी किया गया।
वहीं अमेरिका को देखें तो राष्ट्रपति ने कहा, ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है और इस तरह से उन्होंने आज 2 अप्रेल को मुक्ति दिवस घोषित कर दिया। इस तरह से बच्चे वापिस मुख्य धारा में जुड़ सकेंगे।
ऑटिज्म में बच्चों को अक्षर तीखे दिखाई देते हें और इनका देखने का तरीका भी अलग प्रकार का होता है और ये बच्चे ज्यादा मित्र नहीं बना पाते। अपने अंदर विचार को जागृत करते हैं और फिर वे स्वयं से सवाल करते हैं। जहां पर दूसरे लोग सोचना बंद कर देते हैं, यह लोग उसी विषय को वहां से उठाते हैं। इस तरह से इनको सितारे जमीं पर कहा जाता है।

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