न्यूयार्क। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने टैरिफज का जो नया रूप दुनिया के सामने रखा है, उससे दुनिया भर में एक नयी सोच का जन्म हुआ है। उन्होंने अपने निर्वाचन के बाद से ही उथल-पुथल मचा दी थी और सोच का एक नया दायरा विकसित हुआ। उधर फ्रांस में भ्रष्टाचार, मानवाधिकार की स्थिति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पहले चर्चा फ्रांस की हो तो सामने आता है कि मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां के दबाव में फ्रांस की प्रमुख विपक्षी नेता मरीन ले पेन को पांच साल के लिए चुनाव लडऩे के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 2027 में होने हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रम्प ने भी इस घटनाक्रम पर अफोस जताया है और कहा कि फ्रांस के इतिहास में इस तरह से विपक्षी नेता को अयोग्य नहीं ठहराया गया है। मरीन पेन को रिहा किया जाये। दुनिया के अलग-अलग देशों से भी इसी तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है।
वहीं जब टैरिफज की चर्चा होती है तो उस समय यह भी जान लेना चाहिये कि दुनिया को बदलने की पहल ट्रम्प ने की है। उन्होंने जो निर्णय लिये हैं वह अभूतपूर्व हैं। बाजार में खलबली मची हुई है।
बुधवार शाम को जो निर्णय लिया गया, उसमें टैरिफज के साथ व्यापक शब्द का भी चुनाव किया गया। इसको अंग्रेजी भाषा में कहा जाये तो सामने आता है स्वीपिंग टैरिफज और हिन्दी में इसको व्यापक शुल्क कहा जायेगा।
उन्होंने 2 अप्रेल से पहले इसको ऑटिज्म मुक्ति दिवस का भी नाम दिया था। असल में अमेरिका में 1.7 करोड़ बच्चों को ऑटिज्म की पहचान मिली है। भारत में 1 प्रतिशत से अधिक ऑटिज्म बच्चे हैं। इसको 140 करोड़ का 1 प्रतिशत निकाला जाये तो 1.4 करोड़ बच्चे सामने आते हैं हालांकि अब वे युवा भी हो चुके हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 3 करोड़ या इससे कहीं ज्यादा ऑटिज्म हैं। इसको तारे जमीन पर भी नाम दिया गया है।
टैरिफज की चर्चा की जाये तो सामने आता है कि इसको व्यापक शुल्क कहा जा रहा है। क्योंकि स्वीपिंग टैरिफज ही नाम दिया गया है।
अब व्यापक का हिन्दी में संधि विच्छेद किया जाये तो सामने आता है, व्या+पक। दो शब्दों को जोडक़र बनाया गया है। इसमें एक पंजाबी भाषी शब्द है तो दूसरा हिन्दी। व्या अर्थात शादी। पक अर्थात मजबूत हो। इस तरह से यह शबद बन गया मजबूत शादी। स्वीप का अर्थ ही क्रॉस हो जाता है।
अब संसार में देखने में आ रहा है कि युवा शादी नहीं करवाना चाहते, अगर कोई शादी के लिए तैयार भी होता है तो विवाह के कुछ समय बाद तलाक के मामले अदालत तक पहुंच जाते हैं और यह संख्या हर साल बढ़ती जा रही है।
अमेरिका एक शक्तिशाली देश है। उसकी शक्ति डॉलर में है और वह शक्ति अब पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए दी जा रही है। इस तरह से वैवाहिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए, समाज में एक मजबूत रिश्ता बनाने के लिए डॉलर की शक्ति को शेयर किया जा रहा है।
अब शेयर बाजार की बात की जाये तो उसमें भी बदलाव आ रहा है।
भारत में इसका व्यापक असर दिखाई देने की संभावना है। पिछले चार वर्षों के दौरान भारत में और बाहर फ्रांस, अमेरिका में शेयर बाजार को प्रभावित किया गया। इनके सूचकांक दोगुणा से भी ज्यादा हो गये। इस तरह से जो पिछले 100 सालों में नहीं हुआ था, उसको चार सालों के भीतर कर दिया गया। 2021 के बाद और उससे पहले की दुनिया का विश£ेषण किया जाये तो सामने आयेगा कि जल्दी ही अमीर बनने का एक सपना दिखाया गया। लोगों को सट्टेबाजी की ओर आकर्षित किया गया।
अमेरिका की शेयर बाजार की चर्चा की जाये तो उसमें जो काल्पनिक तेजी लायी गयी थी, वह समाप्त हो रही है। जो सिद्धांत अपनाये गये थे, वह समाप्त किये जा रहे हैं। इस तरह से शेयर बाजार अपनी वास्तविक स्थिति में आकर एक बार पुन: व्यापार की वस्तु बनेगा न कि सट्टाबाजी की।
व्यापक शुल्क जो लगाया गया है, उसका समाज में असर आपको अगले महीने तक ही दिखाई देने लगेगा।
ऑटिज्म लोगों को भी एक नयी दिशा मिलेगी। ट्रम्प ने व्यापार शुल्क नहीं बल्कि समाज को एक नयी दिशा की तरफ ले जाने के लिए कदम उठाया गया है। इसके पीछे काफी मेहनत हुई है और उसके बाद ही यह उत्पाद बनकर बाजार में आया है।
ऐसा नहीं है कि व्यापक शुल्क को 10 मिनिट्स पहले तैयार किया गया और उसको रोलआउट कर दिया गया। इस पर व्यापक चर्चा हुई और उसके बाद इसको दुनिया के सामने पेश किया गया।
वहीं फ्रांस के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह अपनी नेता मरीन ले पेन के समर्थन में सरकार पर दबाव बनाये ताकि राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए जो निर्णय लिये गये हें, उसके लिए बैकफीट पर आया जाये।
भारत के प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त 2024 को लाल किले से देश को आश्वासन दिया था कि जिनका लिया गया है, उनको वापिस किया जायेगा। एक साल पहले जो लिया गया था, उसको वापिस किया जायेगा, के सिद्धांत की घोषणा को एक बरस बितने वाला है और अभी तक उस पर एक कदम भी नहीं चला गया।