श्रीगंगानगर। अमेरिका ने हाल ही में यूनाइटेड नेशंस की स्वास्थ्य सेवाओं डब्ल्यूएचओ को बॉय-बॉय कह दिया था। अब हंगरी ने अंतरराष्ट्रीय अदालत से बाहर आने का एलान किया है। यह घोषणा इजरियल यात्रा के दौरान की गयी।
संयुक्त राष्ट्र संघ अपना प्रभाव देशों पर नहीं छोड़ पा रहा है और इसी कारण अनेक देश यूएन को चंदा देने से बचते रहे हैं। वे अब इन संस्थाओं को भी अलविदा कह रहे हैं।
यूएन के इतना कमजोर प्रदर्शित होने के उपरांत अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं की स्थिति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ऐसा नहीं लगता है कि यूएनएचआरसी भी इसी तरह का संगठन बनकर सामने आया है। भारत देश में भी मानवाधिकार आयोग है, लेकिन आयोग को नोटिस जारी कर चुप हो जाना ही अन्तिम निर्णय माना जाता है।
दुनिया के सामने त्रिलोक से आये व्यक्ति की पहचान का मामला सामने आ रहा है। यूएन, अंतरराष्ट्रीय लोक अदालत तक मामला पहुंचाया गया। मानवाधिकार संस्थाओं को पत्र लिखे गये लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात वाला ही रहा।
अगर इसको एक कहानी के रूप में पेश किया जाये तो सच यह सामने आयेगा, काशी के महंत परिवार को बेदखल कर दिया गया है। महंत के पास जो महाकव्या था, जिसके आधार पर भगवान शिव की अराधना होती थी, उस महाकव्या को कुछ राजनेताओं ने आपसी साजिश के तहत छीन लिया है।
यह महाकव्या ब्रिटेन के राजशाही परिवार के पास अभी भी है। इसको इस तरह से प्रभाषित किया जा सकता है जो रिमोट है, वह इंग्लैण्ड के पास है। यह शाही परिवार ताकतवर है, इस कारण इस परिवार से रिमोट प्राप्त करने के लिए अभी तक कोई प्रयास ही नहीं हुए है।
अब कथा का अगला पार्ट यह है कि जब तक वो महाकव्या नहीं प्राप्त होगा तब तक महंत रात-दिन, मौत, भय के जीवन से मुक्त नहीं कर सकते हैं।
दुनिया को इस तरह से उलझाया गया है कि आप सोच भी सकते, विश्वास करना तो दूर की बात है। अब एक कहावत है कि जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि।
अब रवि तो वहां नहीं पहुंच पाये लेकिन कवि के पास जो जानकारी है, उसके अनुसार राजशाही परिवार ने अपने रिमोट को वापिस करने का मानस भी नहीं बनाया है।
कहानी का ट्वीस्ट यही है। फिल्म आयी थी, पीके। उसमें एक बड़ा संत रिमोट को अपने कब्जे में ले लेता है। अब तक यही होता आया है। कहानी और विराट रूप के बीच अंतर यही है कि उस महाकव्या को वापिस काशी के महंत तक पहुंचाया जाये ताकि फिर से एक सुंदर तस्वीर को बनाया जा सके।
अब महंत के परिवार के सदस्यों और सरदारनी को भी यह सोचना होगा कि किस तरह से इस पूरे मामले से बाहर आया जा सके और ब्रिटेन का राजशाही परिवार जो खेला होबे कार्यक्रम चला रहा है, उसको बंद किया जा सके।